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Mandi News: ‘औषधीय जड़ी बूटियों के उत्पादन में भी हाथ आजमाएं किसान’
Fri, 28 Mar 2025 06:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 28 Mar 2025 06:53 AM IST
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जोगिंद्रनगर/चौंतड़ा (मंडी)। आयुष मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड और अनुसंधान संस्थान, भारतीय चिकित्सा पद्धति के संयुक्त राज्य स्तरीय सम्मेलन में हिमालय औषधीय एवं सगंध पौधों की खेतीबाड़ी के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन जोगिंद्रनगर में किया गया।
जहां पर मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना और लाहौल-स्पीति के 100 से अधिक किसानों को औषधीय पौधों के महत्व और इसके लाभ पर अवगत करवाया गया।
दो दिवसीय कार्यशाला में पहुंचे प्रदेशभर के किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए मुख्य वक्ताओं में शामिल डॉ. तारासेन, मेडिसिन विशेषज्ञ संतभाया, डॉ. नीलम और मदन लाल के साथ जितांशु चंदेल ने औषधीय पौधों के संरक्षण पर पेश आ रही चुनौतियों और इसके समाधान पर उपस्थित किसानों को संबोधित किया।
विलुप्त हो रही दुर्लभ प्रजाति की जड़ी बूटियों के संरक्षण के लिए आयुष विभाग यथासंभव प्रयास कर रहा है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ औषधीय पौधों में शामिल तुलसी, अश्वगंधा, लेमनग्रास की खेती करने के लिए योजनाओं के तहत लाभ दिया जा रहा है।
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कार्यशाला में मौजूद राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. अरुण चंदन, अनुसंधान भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रभारी डॉ. उज्ज्वल शर्मा ने भी जानकारी दी। संवाद
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जहां पर मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना और लाहौल-स्पीति के 100 से अधिक किसानों को औषधीय पौधों के महत्व और इसके लाभ पर अवगत करवाया गया।
दो दिवसीय कार्यशाला में पहुंचे प्रदेशभर के किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए मुख्य वक्ताओं में शामिल डॉ. तारासेन, मेडिसिन विशेषज्ञ संतभाया, डॉ. नीलम और मदन लाल के साथ जितांशु चंदेल ने औषधीय पौधों के संरक्षण पर पेश आ रही चुनौतियों और इसके समाधान पर उपस्थित किसानों को संबोधित किया।
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विलुप्त हो रही दुर्लभ प्रजाति की जड़ी बूटियों के संरक्षण के लिए आयुष विभाग यथासंभव प्रयास कर रहा है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ औषधीय पौधों में शामिल तुलसी, अश्वगंधा, लेमनग्रास की खेती करने के लिए योजनाओं के तहत लाभ दिया जा रहा है।
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कार्यशाला में मौजूद राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. अरुण चंदन, अनुसंधान भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रभारी डॉ. उज्ज्वल शर्मा ने भी जानकारी दी। संवाद