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Mandi News: डॉ. तारा ने दुनिया को समझाई जल संरक्षण की अहमियत

Sat, 24 Oct 2026 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:56 PM IST
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Dr. Tara explained the importance of water conservation to the world.
7वें विश्व पर्यावरण शिखर सम्मेलन में दिया आमंत्रित व्याख्यान
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18 देशों के 350 प्रतिनिधि ले रहे हैं भाग

संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमालयी पौधे मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और जल सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी महत्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखते हुए वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी के वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. तारा देवी सेन ने श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित सातवें विश्व पर्यावरण शिखर सम्मेलन में आमंत्रित व्याख्यान दिया। सम्मेलन में 18 देशों के 350 प्रतिनिधि ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं।
डॉ. सेन ने पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान के आधार पर प्रकृति से जल सुरक्षा के उपाय तलाशने पर शोध प्रस्तुत किया। इसमें जल संरक्षण, जल गुणवत्ता में सुधार और जलग्रहण क्षेत्रों के पुनर्स्थापन में हिमालयी पौधों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। शोध में मंडी जिले के स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और पौध विविधता के बीच संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
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अध्ययन के दौरान 100 सूचनादाताओं से संवाद, क्षेत्रीय अवलोकन और वैज्ञानिक साहित्य के आधार पर 18 वनस्पति कुलों से संबंधित 24 पौध टैक्सा का दस्तावेजीकरण किया गया। शोध में बान, देवदार, एल्डर और विलो प्रजातियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया। ये पौधे मृदा स्थिरीकरण, कटाव नियंत्रण, जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और नदी किनारे के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में उपयोगी हैं।
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शोध की प्रमुख उपलब्धियों में हिमालयी पौध-आधारित जल सुरक्षा रूपरेखा का प्रस्ताव शामिल है। इसमें पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान, वैज्ञानिक मूल्यांकन, जल पुनर्भरण क्षेत्रों की सुरक्षा, आर्द्रभूमि संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है। इससे जलग्रहण क्षेत्रों के पुनर्स्थापन और प्रकृति-आधारित समाधान तैयार करने में मदद मिल सकती है। डॉ. सेन पिछले 18 वर्षों से अधिक समय से हिमालयी जंगली खाद्य पौधों, पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही हैं।
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