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एक मार्च को देवलुओं संग मंडी पहुंचेंगे देव पाइंदल ऋषि डोलरा
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द्रंग क्षेत्र के आराध्य देव पाइंदल ऋषि डोलरा अपने मूल स्थान में। फाइल फोटो
- फोटो : Mandi
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मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए एक मार्च को दो हजार देवलुओं के साथ द्रंग क्षेत्र के आराध्य देव पाइंदल (पतंजलि ऋषि) मंडी पहुंचेंगे। देवता खलियार के पास चौहारघाटी के अन्य देवताओं के साथ भव्य मिलन के बाद राज देवता माधो राय के दरबार पहुंचते हैं।
पुरानी मंडी स्कूल में देवता के बैठने का स्थान है लेकिन वह अपने हारुओं के घर में ही विराजमान रहते हैं। दिन के समय पड्डल में रहते हैं। देवता राजाओं के समय से महाशिवरात्रि मेले में आते हैं। देवता दो सिरे द्रंग और दुग्धा क्षेत्र के मालिक माने जाते हैं। 12 महीने तक अपनी हार भ्रमण पर ही रहते हैं।
देवता पाइंदल ऋषि देव बुढ़ाबिंगल के बेटे और मां जालपा सरौण एवं माता चामुंडा द्रंग के भाई हैं। द्रंग के डोलरा गांव में पाइंदल ऋषि का भव्य मंदिर है। देवता की हार जिला कुल्लू और मंडी के कोटली क्षेत्र में भी है, जहां देव पाइंदल ऋषि विशेष बुलावे पर आस्थावान श्रद्धालुओं के घरों में जाते हैं।
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पाइंदल ऋषि कमेटी के प्रधान मनोज ठाकुर ने बताया कि देवता का रथ वर्ष में दस दिन भी अपने मंदिर में नहीं होता। बड़ीहार होने के कारण लोग रोजाना किसी समारोह पर देवता को दावत पर अपने घर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि देव पाइंदल ऋषि सरहद में तैनात सैनिकों की रक्षा के लिए खड़े होते हैं, जबकि क्षेत्र की सुख शांति और खुशहाली के लिए सदा आशीर्वाद बनाए रखते हैं। देव एक मार्च को महाशिवरात्रि के लिए मंडी पहुंचेंगे।
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पुरानी मंडी स्कूल में देवता के बैठने का स्थान है लेकिन वह अपने हारुओं के घर में ही विराजमान रहते हैं। दिन के समय पड्डल में रहते हैं। देवता राजाओं के समय से महाशिवरात्रि मेले में आते हैं। देवता दो सिरे द्रंग और दुग्धा क्षेत्र के मालिक माने जाते हैं। 12 महीने तक अपनी हार भ्रमण पर ही रहते हैं।
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देवता पाइंदल ऋषि देव बुढ़ाबिंगल के बेटे और मां जालपा सरौण एवं माता चामुंडा द्रंग के भाई हैं। द्रंग के डोलरा गांव में पाइंदल ऋषि का भव्य मंदिर है। देवता की हार जिला कुल्लू और मंडी के कोटली क्षेत्र में भी है, जहां देव पाइंदल ऋषि विशेष बुलावे पर आस्थावान श्रद्धालुओं के घरों में जाते हैं।
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पाइंदल ऋषि कमेटी के प्रधान मनोज ठाकुर ने बताया कि देवता का रथ वर्ष में दस दिन भी अपने मंदिर में नहीं होता। बड़ीहार होने के कारण लोग रोजाना किसी समारोह पर देवता को दावत पर अपने घर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि देव पाइंदल ऋषि सरहद में तैनात सैनिकों की रक्षा के लिए खड़े होते हैं, जबकि क्षेत्र की सुख शांति और खुशहाली के लिए सदा आशीर्वाद बनाए रखते हैं। देव एक मार्च को महाशिवरात्रि के लिए मंडी पहुंचेंगे।