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महाशिवरात्रि के शुभारंभ के लिए देव कमरूनाग छोटी काशी रवाना
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अपने मूल निवास गांव मथाण से मंडी महाशिवरात्रि मेले के कारज शुरू करने को लेकर रवाना होते बड़ा देव ?
- फोटो : Mandi
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गोहर (मंडी)। जिला मंडी के अधिष्ठाता बड़ादेव कमरूनाग मंगलवार को पूरे लाव लश्कर और पुलिस सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के शुभारंभ के लिए अपने मूल स्थान मथाण से सुबह दस बजे मंडी रवाना हुए। छह दिन तक करीब 60 किमी पैदल सफर तय कर देव कमरूनाग 28 फरवरी को महाशिवरात्रि से एक दिन पहले छोटी काशी मंडी पहुंचेंगे।
पुलघराट के पास प्रशासन की ओर से देव कमरूनाग का भव्य स्वागत होगा। उसी दिन बड़ादेव कमरूनाग राजदेवता माधोराय से दिव्य मिलन करेंगे और सहमति के बाद ही महाशिवरात्रि के कारज शुरू होंगे। राजदेवता माधोराय और राज परिवार से मिलने के बाद बड़ादेव कमरूनाग टारना मंदिर में विराजमान होंगे। यात्रा के दौरान रास्ते में बड़ादेव श्रद्धालुओं के घरों में रात्रि ठहराव भी करेंगे।
देवता के गूर टिकम राम ने बताया कि मंगलवार को देवता का रात्रि ठहराव चैलचौक में होगा। उसके बाद देवता बग्गी होते हुए बल्ह के नेरचौक, नागचला, बगला, रानीबाईं होकर पुलघराट पहुंचेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं के घरों में देवता का ठहराव रहेगा।
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यह है मान्यता
महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर मान्यता है कि यह एक ऐसा महोत्सव है जिसमें शैव, वैष्णव और लोक देवता का संगम होता है।
शैव भगवान शिव को कहा गया है, वैष्णव भगवान श्रीकृष्ण को और लोक देवता देव कमरूनाग को कहा गया है। इन तीनों की अनुमति के बाद ही मंडी का महाशिवरात्रि महोत्सव शुरू होता है। इतिहासकार बताते हैं कि रियासतकाल में वर्ष में एक बार यानी महाशिवरात्रि के दौरान मंडी रियासत के सभी ग्रामीण अपने ग्राम देवताओं सहित राजा से मिलने आते थे। उस दौरान महाशिवरात्रि का उत्सव भी मनाया जाता था।
...
2, 5 और 8 मार्च को निकलेगी जलेब
एडीसी जतिन लाल ने बताया कि महाशिवरात्रि मेले के लिए मंडी तैयार है। 2 से 8 मार्च तक मनाए जाने वाले इस मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। वह 2 मार्च को प्रथम जलेब की अगवानी करेंगे।
मध्य जलेब 5 मार्च को निकाली जाएगी। इसकी अगवानी जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह करेंगे। तीसरी और अंतिम जलेब में 8 मार्च को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शामिल होंगे।
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पुलघराट के पास प्रशासन की ओर से देव कमरूनाग का भव्य स्वागत होगा। उसी दिन बड़ादेव कमरूनाग राजदेवता माधोराय से दिव्य मिलन करेंगे और सहमति के बाद ही महाशिवरात्रि के कारज शुरू होंगे। राजदेवता माधोराय और राज परिवार से मिलने के बाद बड़ादेव कमरूनाग टारना मंदिर में विराजमान होंगे। यात्रा के दौरान रास्ते में बड़ादेव श्रद्धालुओं के घरों में रात्रि ठहराव भी करेंगे।
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देवता के गूर टिकम राम ने बताया कि मंगलवार को देवता का रात्रि ठहराव चैलचौक में होगा। उसके बाद देवता बग्गी होते हुए बल्ह के नेरचौक, नागचला, बगला, रानीबाईं होकर पुलघराट पहुंचेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं के घरों में देवता का ठहराव रहेगा।
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यह है मान्यता
महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर मान्यता है कि यह एक ऐसा महोत्सव है जिसमें शैव, वैष्णव और लोक देवता का संगम होता है।
शैव भगवान शिव को कहा गया है, वैष्णव भगवान श्रीकृष्ण को और लोक देवता देव कमरूनाग को कहा गया है। इन तीनों की अनुमति के बाद ही मंडी का महाशिवरात्रि महोत्सव शुरू होता है। इतिहासकार बताते हैं कि रियासतकाल में वर्ष में एक बार यानी महाशिवरात्रि के दौरान मंडी रियासत के सभी ग्रामीण अपने ग्राम देवताओं सहित राजा से मिलने आते थे। उस दौरान महाशिवरात्रि का उत्सव भी मनाया जाता था।
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2, 5 और 8 मार्च को निकलेगी जलेब
एडीसी जतिन लाल ने बताया कि महाशिवरात्रि मेले के लिए मंडी तैयार है। 2 से 8 मार्च तक मनाए जाने वाले इस मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। वह 2 मार्च को प्रथम जलेब की अगवानी करेंगे।
मध्य जलेब 5 मार्च को निकाली जाएगी। इसकी अगवानी जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह करेंगे। तीसरी और अंतिम जलेब में 8 मार्च को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शामिल होंगे।