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चेक बाउंस के मामले में एक साल की कारावास, दो लाख जुर्माना
Updated Mon, 29 Jan 2018 10:57 PM IST
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मंडी। चेक बाउंस का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को एक साल के साधारण कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि निश्चित समय में अदा नहीं करने पर उसे तीन माह की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतनी होगी। जबकि आरोपी से प्राप्त जुर्माना राशि में से एक लाख 60 हजार रुपये बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता के पक्ष में अदा किया जाएगा।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजेश चौहान की अदालत ने औट तहसील के पनारसा स्थित मैसर्ज शेष नाग फिलिंग स्टेशन के मालिक ज्योति प्रकाश की शिकायत पर चलाए गए अभियोग के साबित होने पर सुंदरनगर तहसील के भौर (कनैड) निवासी आरोपी नरेंद्र कुमार पुत्र भगत राम को उक्त सजा का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता आरके चावला के माध्यम से अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा 138 के तहत दायर शिकायत के अनुसार उक्त आरोपी नरेन्द्र कुमार ने शिकायतकर्ता ज्योति प्रकाश से 5 अक्तूबर 2011 को 1,50,000 रुपये की राशि उधार ली थी। जिसे आरोपी ने 31 दिसंबर तक लौटाने का आश्वासन दिया था। आरोपी ने उक्त राशि लौटाने के लिए शिकायतकर्ता के पक्ष में एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ने जब इस चेक को भुगतान के लिए बैंक में लगाया तो आरोपी के खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण यह बाउंस हो गया था। इसके चलते शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस देकर 15 दिनों में राशि अदा करने को कहा था। लेकिन इसके बावजूद भी राशि की अदायगी न होने पर उन्होंने अदालत में शिकायत दायर करके आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चेक बाउंस का अभियोग साबित हुआ है। इसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजेश चौहान की अदालत ने औट तहसील के पनारसा स्थित मैसर्ज शेष नाग फिलिंग स्टेशन के मालिक ज्योति प्रकाश की शिकायत पर चलाए गए अभियोग के साबित होने पर सुंदरनगर तहसील के भौर (कनैड) निवासी आरोपी नरेंद्र कुमार पुत्र भगत राम को उक्त सजा का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता आरके चावला के माध्यम से अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा 138 के तहत दायर शिकायत के अनुसार उक्त आरोपी नरेन्द्र कुमार ने शिकायतकर्ता ज्योति प्रकाश से 5 अक्तूबर 2011 को 1,50,000 रुपये की राशि उधार ली थी। जिसे आरोपी ने 31 दिसंबर तक लौटाने का आश्वासन दिया था। आरोपी ने उक्त राशि लौटाने के लिए शिकायतकर्ता के पक्ष में एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ने जब इस चेक को भुगतान के लिए बैंक में लगाया तो आरोपी के खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण यह बाउंस हो गया था। इसके चलते शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस देकर 15 दिनों में राशि अदा करने को कहा था। लेकिन इसके बावजूद भी राशि की अदायगी न होने पर उन्होंने अदालत में शिकायत दायर करके आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चेक बाउंस का अभियोग साबित हुआ है। इसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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