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चरस तस्करी के आरोपी को दस साल का कठोर कारावास
Updated Sun, 08 Oct 2017 10:55 PM IST
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मंडी। चरस तस्करी का अभियोग साबित होने पर अदालत ने दोषी को दस साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने का फैसला सुनाया है। जुर्माना राशि को निश्चित समय में अदा न करने पर दोषी को एक साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुने राम पहाड़िया की विशेष अदालत ने पश्चिमी बंगाल के पैमामेंटल स्ट्रीट (कोलकाता) निवासी मोहम्मद नदीम पुत्र शेख अब्दुल मजीद के खिलाफ मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोग साबित होने पर उक्त सजा का फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार औट पुलिस थाना का दल 13 फरवरी 2015 को एएसआई मोहर सिंह की अगुवाई में झलोगी के पास गश्त और ट्रैफिक चेकिंग के लिए मौजूद था। इसी दौरान आरोपी थलौट की ओर से एक बैग के साथ मंडी की ओर आया। पुलिस दल को देखकर आरोपी ने पीछे की ओर मुड़कर भागने की कोशिश की। ऐसे में पुलिस ने आरोपी को काबू करके उसके बैग की तलाशी ली तो इसमें से 2 किलोग्राम चरस बरामद हुई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए उप जिला न्यायवादी नवीन चंद्र ने 8 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी पर अभियोग साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चरस बरामदगी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी से बरामदशुदा चरस की मात्रा व्यवसायिक होने के कारण उसे उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार औट पुलिस थाना का दल 13 फरवरी 2015 को एएसआई मोहर सिंह की अगुवाई में झलोगी के पास गश्त और ट्रैफिक चेकिंग के लिए मौजूद था। इसी दौरान आरोपी थलौट की ओर से एक बैग के साथ मंडी की ओर आया। पुलिस दल को देखकर आरोपी ने पीछे की ओर मुड़कर भागने की कोशिश की। ऐसे में पुलिस ने आरोपी को काबू करके उसके बैग की तलाशी ली तो इसमें से 2 किलोग्राम चरस बरामद हुई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए उप जिला न्यायवादी नवीन चंद्र ने 8 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी पर अभियोग साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चरस बरामदगी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी से बरामदशुदा चरस की मात्रा व्यवसायिक होने के कारण उसे उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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