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Mandi News: एमसीएच और आईसीटीसी लैब के भवन में दरारें
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मरीजों की सुरक्षा पर सवाल, मानसून में बढ़ा खतरा
50 साल पुराने भवनों में चल रही स्वास्थ्य सेवाएं; एसडीएम ने तलब की रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर के एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड हेल्थ) भवन और आईसीटीसी लैब की जर्जर हालत मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। दोनों भवनों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। वहीं, बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और प्लास्टर गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
करीब पांच दशक पुराने इन भवनों में वर्तमान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न स्वास्थ्य जांच संबंधी कार्य किए जा रहे हैं। एमसीएच भवन की छत से प्लास्टर के टुकड़े गिरने लगे हैं, जबकि आईसीटीसी लैब की दीवारों में आई दरारों के कारण स्वास्थ्य कर्मियों में भी डर का माहौल है। मानसून के दौरान भवनों में रिसाव बढ़ने से किसी बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है। कुछ माह पहले भी अस्पताल के जर्जर भवनों की छत से प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी। उस दौरान मरीज और तीमारदार बाल-बाल बच गए थे। इसके बाद रोगी कल्याण समिति की बैठक में भवनों की मरम्मत और स्थायी समाधान के लिए समिति गठित की गई थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। मानसून के चलते भवनों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
अस्पताल पहुंचे तीमारदार विनय, कविता, सुरेश और अजय ने कहा कि इन भवनों में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। एसडीएम एवं रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष मनीष चौधरी ने बताया कि जोगिंद्रनगर उपमंडल के सभी विभागों से असुरक्षित भवनों की जानकारी मांगी गई है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी अनहोनी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन से भी रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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50 साल पुराने भवनों में चल रही स्वास्थ्य सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर के एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड हेल्थ) भवन और आईसीटीसी लैब की जर्जर हालत मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। दोनों भवनों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। वहीं, बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और प्लास्टर गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
करीब पांच दशक पुराने इन भवनों में वर्तमान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न स्वास्थ्य जांच संबंधी कार्य किए जा रहे हैं। एमसीएच भवन की छत से प्लास्टर के टुकड़े गिरने लगे हैं, जबकि आईसीटीसी लैब की दीवारों में आई दरारों के कारण स्वास्थ्य कर्मियों में भी डर का माहौल है। मानसून के दौरान भवनों में रिसाव बढ़ने से किसी बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है। कुछ माह पहले भी अस्पताल के जर्जर भवनों की छत से प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी। उस दौरान मरीज और तीमारदार बाल-बाल बच गए थे। इसके बाद रोगी कल्याण समिति की बैठक में भवनों की मरम्मत और स्थायी समाधान के लिए समिति गठित की गई थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। मानसून के चलते भवनों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
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अस्पताल पहुंचे तीमारदार विनय, कविता, सुरेश और अजय ने कहा कि इन भवनों में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। एसडीएम एवं रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष मनीष चौधरी ने बताया कि जोगिंद्रनगर उपमंडल के सभी विभागों से असुरक्षित भवनों की जानकारी मांगी गई है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी अनहोनी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन से भी रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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