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करुणामूलक आश्रितों को वनटाइम सेटलमेंट में दी जाए नियुक्तियां
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मंडी में करुणामूलक संघ के प्रदेशाध्यक्ष पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए।
- फोटो : Mandi
मंडी। करुणामूलक आधार पर नौकरियां देने के मामलों पर सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई है, जबकि 4500 से ज्यादा मामले लंबित हैं। कुछ परिवार तो करीब 20 सालों से नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं। यह बात करुणामूलक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार ने मंडी में प्रेसवार्ता में कही।
उनके साथ सचिव रजत पठानिया और मीडिया प्रभारी गगन कुमार भी मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि 88 दिन से शिमला में क्रमिक भूख हड़ताल पर प्रभावित बैठे हैं लेकिन सरकार वार्ता करने नहीं आ सकी। इसका बदला सभी करुणामूूलक वोट से चोट करके लेंगे।
आश्रित परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। आश्वासनों के सिवा आज दिन तक कुछ हाथ नहीं लगा है। संघ ने मांग की है कि समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक मामलों में वन टाइम सेटलमेंट के तहत सभी को एक साथ नियुक्तियां दी जाएं।
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योग्यता के अनुसार आश्रितों को बिना शर्त के सभी श्रेणियों में नौकरी दी जाए। पांच प्रतिशत कोटा शर्त को हटा कर विभाग अपने तौर पर नियुक्तियां दे। जब किसी महिला आवेदक की शादी हो जाती है तो उसे पॉलिसी से बाहर किया जाता है, इस शर्त को भी हटाया जाए। संवाद
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उनके साथ सचिव रजत पठानिया और मीडिया प्रभारी गगन कुमार भी मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि 88 दिन से शिमला में क्रमिक भूख हड़ताल पर प्रभावित बैठे हैं लेकिन सरकार वार्ता करने नहीं आ सकी। इसका बदला सभी करुणामूूलक वोट से चोट करके लेंगे।
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आश्रित परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। आश्वासनों के सिवा आज दिन तक कुछ हाथ नहीं लगा है। संघ ने मांग की है कि समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक मामलों में वन टाइम सेटलमेंट के तहत सभी को एक साथ नियुक्तियां दी जाएं।
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योग्यता के अनुसार आश्रितों को बिना शर्त के सभी श्रेणियों में नौकरी दी जाए। पांच प्रतिशत कोटा शर्त को हटा कर विभाग अपने तौर पर नियुक्तियां दे। जब किसी महिला आवेदक की शादी हो जाती है तो उसे पॉलिसी से बाहर किया जाता है, इस शर्त को भी हटाया जाए। संवाद
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