{"_id":"696542c4ff2718e78502359a","slug":"a-radiologist-should-be-appointed-at-the-nerchowk-medical-college-praveen-mandi-news-c-90-1-mnd1001-182324-2026-01-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज नेरचौक में की जाए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती : प्रवीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज नेरचौक में की जाए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती : प्रवीण
विज्ञापन
नेरचौक (मंडी)। भाजपा के पूर्व प्रदेश सचिव एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रवीण कुमार शर्मा ने लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक के रेडियोलॉजी विभाग में चिकित्सक उपलब्ध करवाने की मुख्यमंत्री से मांग की है। प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि 1500 से अधिक ओपीडी वाले मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रेडियोलाॅजी विभाग में चिकित्सकों के आठ पद स्वीकृत हैं। वर्तमान समय में केवल एक चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। 26 दिसंबर से उक्त चिकित्सक भी मेडिकल लीव पर हैं। चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को सीटी स्कैन बाहर निजी लैब में करवाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। सीटी स्कैन मेडिकल कॉलेज में मात्र 1300 से 2600 रुपये के बीच में होता है जबकि निजी लैब में 6500 से 8000 रुपये खर्च करना पड़ रहे हैं।
इसी तरह अल्ट्रासाउंड टेस्ट अस्पताल में फ्री होता है, उसके भी मरीजों को दो से तीन हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दुखद बात यह है कि करीब पांच महीने पूर्व एक मात्र रेजिडेंट डॉक्टर के ट्रांसफर होने से अल्ट्रासाउंड टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इस विभाग में एक एमआरआई मशीन को स्थापित करने के लिए मंजूरी प्रदान की है। एमआरआई मशीन के लिए डॉक्टर (रेडियोलॉजिस्ट) और प्रशिक्षित तकनीशियन दोनों की जरूरत होती है। अगर डॉक्टर ही नहीं होगा तो यह मशीन भी सफेद हाथी बन कर रह जाएगी। मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेश के इस महत्वपूर्ण संस्थान में कम से कम तीन रेडियोलाॅजिस्ट (डॉक्टर) उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आदेश जारी किए जाएं। संवाद
विज्ञापन
इसी तरह अल्ट्रासाउंड टेस्ट अस्पताल में फ्री होता है, उसके भी मरीजों को दो से तीन हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दुखद बात यह है कि करीब पांच महीने पूर्व एक मात्र रेजिडेंट डॉक्टर के ट्रांसफर होने से अल्ट्रासाउंड टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इस विभाग में एक एमआरआई मशीन को स्थापित करने के लिए मंजूरी प्रदान की है। एमआरआई मशीन के लिए डॉक्टर (रेडियोलॉजिस्ट) और प्रशिक्षित तकनीशियन दोनों की जरूरत होती है। अगर डॉक्टर ही नहीं होगा तो यह मशीन भी सफेद हाथी बन कर रह जाएगी। मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेश के इस महत्वपूर्ण संस्थान में कम से कम तीन रेडियोलाॅजिस्ट (डॉक्टर) उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आदेश जारी किए जाएं। संवाद
विज्ञापन