फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi News ›   परंपराओं से जुड़ी है मलवाणा की दीपावली

परंपराओं से जुड़ी है मलवाणा की दीपावली

Thu, 23 Oct 2014 05:32 AM IST
Mandi
Mandi Updated Thu, 23 Oct 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
मंडी। दीपावली का त्योहार यूं तो देश भर में मनाया जाता है, लेकिन मंडी जिले की बल्हघाटी के मलवाणा गांव की दीपावली का मिजाज सबसे अलग है। यहां की दीपावली भगवती मनसा देवी को समर्पित रहती है। पटाखों और आतिशबाजियों के शोर से हट कर मलवाणा की दीपावली ग्रामीण परिवेश की सादगी और लोकरंग के समावेश की परिचायक भी है।
विज्ञापन

दिवाली फेरना
दीपावली से करीब एक सप्ताह पूर्व खुले खेतों में गांव के बच्चे घास के गट्ठर बांधकर रात के अंधेरे में उन्हें आग लगाकर अपने सिर के ऊपर से घुमाते हुए जोर-जोर से चिल्लाते हैं -दयाली ओए दयाली। यह क्रम दिवाली की रात तक जारी रहता है। इसे स्थानीय बोली में घुरसू फेरना कहा जाता है। मलवाणा और आसपास के गांवों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका निर्वहन आज भी हो रहा है।
विज्ञापन

मनसा देवी की जाग
दिवाली की पूर्व संध्या पर भगवती मनसा देवी के प्राचीन मंदिर देवीधार में जाग का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देवी का रथ ढोल नगाड़ों के साथ मंदिर में ले जाया जाता है। जहां रात भर अलाव जला कर जाग का आयोजन होता है। आधी रात को देवी का गूर देव खेल करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दिवाली मेला
मनसा देवी के नागधार स्थित दूसरे मंदिर में दीपावली के दिन मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान मनसा देवी के रथ के अलावा देव कांढी बालाकामेश्वर, देव टिक्कर बालाकामेश्वर समेत करीब आधा दर्जन देवी देवताओं के रथ मेले में पधारते हैं। मेले के दौरान देवताओं के गूर लोगों की खुशहाली और समृद्धि के लिए कार बांधते हैं। इस दौरान देवताओं के गूर ढोल नगाड़ों की तान पर नृत्य करते हैं।
बांठड़ा का मंचन
मलवाणा की दीपावली के दौरान मंडी जनपद का मशहूर लोकनाट्य बांठड़ा के मंचन की परंपरा रही है। इस दौरान मलवाणा के अलावा बड़सू और सायरी गांव से भी स्वांगी आकर बांठड़ा के स्वांग करते रहे हैं।

-मनसा देवी सेवा समिति के अध्यक्ष जीत सिंह ठाकुर और किसान क्लब मलवाणा के लालमन शर्मा का कहना है कि मलवाणा की दीपावली भगवती मनसा देवी को समर्पित है। माता की जाग और मेले के दौरान बलि देने की परंपरा थी, जिसे इस बार नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed