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इलेक्ट्रो मेगनेटिक तकनीक से चलेगी बिना ईंधन की बुलेट ट्रेन
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मंडी। पहाड़ में बुलेट ट्रेन का सपना देख कर आठवीं के छात्र ने एक बिना ईंधन के चलने वाली बुलेट ट्रेन का मॉडल तैयार किया है। यह छात्र सीएम के गृहक्षेत्र सिराज के कशैंबलीधार स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ता है। यह बुलेट ट्रेन चुंबक की पटरी पर चलेगी और इसका इंजन भी चुंबक का ही होगा। बुलेट ट्रेन के मॉडल को बनाने के लिए पोपेंद्र ने इलेक्ट्रो मेगनेटिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। जिससे यह ट्रेन पटरी से करीब दो से तीन इंच ऊपर चलेगी। भारत सरकार के मुंबई टू थाने बुलेट प्रोजेक्ट के आधार पर ही छात्र ने यह मॉडल पहाड़ों के लिए तैयार किया है। इस मॉडल की खास बात यह भी है कि इस ट्रेन को चलाने के लिए किसी भी ईंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे महज इलेक्ट्रो मेगनेटिक तकनीक से चलाया और रोका जाएगा। इसमें दो विकल्प रखे गए हैं। ट्रेन की स्पीड को अधिक करने के लिए चुंबक से बने इंजन को बिजली से रफ्तार दी जा सकेगी। प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र सिराज जहां पैदल रास्ते तक तंग हैं और सड़कें भी खतरनाक हैं। वहां बुलेट ट्रेन जैसा सपना देखकर कर छात्र ने इसे तैयार किया है। पोपेंद्र का कहना है कि इस ट्रेन की पटरी और निर्माण में तो लागत आएगी। लेकिन, इसके संचालन में ईंधन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हालांकि, यदि इस ट्रेन की स्पीड में इजाफा करना है तो बिजली से इंजन को संचालित करना पड़ेगा। लेकिन, इसकी खपत भी बेहद कम होगी।
राज्यस्तरीय मेले में मॉडल किया था प्रदर्शित
सामान्य रेल में पटरी लोहे की होती है। रेल के इंजन को चलाने के लिए ईंधन का इस्तेमाल भी किया जाता है। इनकी स्पीड भी 100 से 150 किमी प्रति घंटा होती है। इन ट्रेन के संचालन में ईंधन में भारी खपत होती है। लेकिन, चुंबक की पटरी पर चलने वाली इस ट्रेन में ईंधन की खपत नहीं होगी। इस मॉडल को राज्यस्तरीय विज्ञान मेले में प्रदर्शित किया जा चुका है। हाल ही मंडी में इस विज्ञान मेले का आयोजन किया गया था।
विद्यार्थियों ने विज्ञान मॉडल प्रस्तुत कर दिखाई प्रतिभा
अमर उजाला ब्यूरो
थुनाग(मंडी)। राजकीय माध्यमिक पाठशाला सुमनीधार में वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रखते हुए वर्ष भर बनाए गए मॉडलों को विज्ञान और गणित मेले में प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत कुकलाह के प्रधान रेवती राम ने शिरकत की। मेले में केंद्र प्राथमिक पाठशाला सुमनीधार, कशैंबलीधार, बांदल व केंद्र की साथ लगती सभी पाठशालाओं के लगभग 210 बच्चों ने भाग लिया। बच्चों ने लगभग 60 से अधिक मॉडल पेश किए और उनके पीछे के विज्ञान व गणित को प्रयोग से समझाया। मेले का मुख्य आकर्षण कशैंबलीधार के आठवीं के छात्र पोपेंद्र ठाकुर द्वारा प्रस्तुत बुलेट ट्रेन रही। इसके अलावा तारों के जंजाल से मुक्ति दिलाती वायरलेस विद्युत प्रणाली, वायरलेस चार्जर, बहु उपयोगी विद्युत कटर, चार्ज होने वाले नाइट लैंप, मल्टीपल विद्युत जेनरेटर, कागज की केतली में चाय, वस्त्र बुनाई, सौर ऊर्जा और पहाड़ा मशीन मुख्य रहे। मेले में लगे मैजिक स्टाल में भारी भीड़ रही, जिसमें विज्ञान और गणित मॉडलों से लोगों में फैले अंधविश्वासों को दूर करने का प्रयास किया गया। दिव्यांग बच्चों की भागीदारी ने सब का मन मोह लिया। इस अवसर पर बच्चों के प्रदर्शन से चकित मुख्यातिथि ने 5000 रुपये नवाचार शिक्षण को जारी रखने के लिए दिए। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में इस तरह से गतिविधि आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की बात भी कही। प्रदर्शनी में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कशैंबलीधार, बांदल के प्रधानाचार्य और स्टाफ, एसएमसी प्रधान दुर्गा देवी और वेद प्रकाश, पंचायत के उपप्रधान, सदस्य, अन्य ग्रामीणों तथा अभिभावकों ने भाग लिया।
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राज्यस्तरीय मेले में मॉडल किया था प्रदर्शित
सामान्य रेल में पटरी लोहे की होती है। रेल के इंजन को चलाने के लिए ईंधन का इस्तेमाल भी किया जाता है। इनकी स्पीड भी 100 से 150 किमी प्रति घंटा होती है। इन ट्रेन के संचालन में ईंधन में भारी खपत होती है। लेकिन, चुंबक की पटरी पर चलने वाली इस ट्रेन में ईंधन की खपत नहीं होगी। इस मॉडल को राज्यस्तरीय विज्ञान मेले में प्रदर्शित किया जा चुका है। हाल ही मंडी में इस विज्ञान मेले का आयोजन किया गया था।
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विद्यार्थियों ने विज्ञान मॉडल प्रस्तुत कर दिखाई प्रतिभा
अमर उजाला ब्यूरो
थुनाग(मंडी)। राजकीय माध्यमिक पाठशाला सुमनीधार में वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रखते हुए वर्ष भर बनाए गए मॉडलों को विज्ञान और गणित मेले में प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत कुकलाह के प्रधान रेवती राम ने शिरकत की। मेले में केंद्र प्राथमिक पाठशाला सुमनीधार, कशैंबलीधार, बांदल व केंद्र की साथ लगती सभी पाठशालाओं के लगभग 210 बच्चों ने भाग लिया। बच्चों ने लगभग 60 से अधिक मॉडल पेश किए और उनके पीछे के विज्ञान व गणित को प्रयोग से समझाया। मेले का मुख्य आकर्षण कशैंबलीधार के आठवीं के छात्र पोपेंद्र ठाकुर द्वारा प्रस्तुत बुलेट ट्रेन रही। इसके अलावा तारों के जंजाल से मुक्ति दिलाती वायरलेस विद्युत प्रणाली, वायरलेस चार्जर, बहु उपयोगी विद्युत कटर, चार्ज होने वाले नाइट लैंप, मल्टीपल विद्युत जेनरेटर, कागज की केतली में चाय, वस्त्र बुनाई, सौर ऊर्जा और पहाड़ा मशीन मुख्य रहे। मेले में लगे मैजिक स्टाल में भारी भीड़ रही, जिसमें विज्ञान और गणित मॉडलों से लोगों में फैले अंधविश्वासों को दूर करने का प्रयास किया गया। दिव्यांग बच्चों की भागीदारी ने सब का मन मोह लिया। इस अवसर पर बच्चों के प्रदर्शन से चकित मुख्यातिथि ने 5000 रुपये नवाचार शिक्षण को जारी रखने के लिए दिए। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में इस तरह से गतिविधि आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की बात भी कही। प्रदर्शनी में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कशैंबलीधार, बांदल के प्रधानाचार्य और स्टाफ, एसएमसी प्रधान दुर्गा देवी और वेद प्रकाश, पंचायत के उपप्रधान, सदस्य, अन्य ग्रामीणों तथा अभिभावकों ने भाग लिया।
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