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नामांकन के मुहूर्त के लिए पंडितों की शरण में प्रत्याशी
Updated Mon, 16 Oct 2017 06:54 PM IST
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धर्मपुर (मंडी)। प्रदेश में आचार संहिता जारी हो गई है और अब नामांकन भरने की प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। हालांकि, बड़े दलों ने अभी तक अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है, लेकिन टिकट के चाहने वालों ने अपने-अपने अंक जोड़ के लिए पंडितों और मंदिरों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं। मंडी जिला की बात करें तो यहां कुल दस विस क्षेत्र हैं और टिकट के चाहने वालों की दोनों ही दलों में लंबी कतारें हैं। प्रत्याशियों का मानना है कि पहले भाग्य देखना होता है फिर उसके बाद जो तिथि और समय उन्हें दिया जाता है उसमें वह अपना नामांकन पत्र दाखिल करते हैं। छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी इसी मुहूर्त के अनुसार अपने नामांकन की तिथि और समय निर्धारित कर दिया है। बड़े दलों भाजपा और कांग्रेस में टिकटों को लेकर घमासान चला हुआ है तथा कुछ टिकट के चाहने वाले दिल्ली में डेरा जमाए बैठे हैं। दिग्गज नेता टिकट के पीछे भागने की बजाय अपने क्षेत्र में लोगों से संपर्क में जुटे हुए हैं और अपने लिए वोट मांग रहे हैं उनका कहना है कि असली टिकट तो जनता देती है, जिसके साथ जनता होती है उसे कौन हरा सकता है। नामांकन के लिए 16 तारीख से 23 तारीख तक का समय चुनाव आयोग ने दिया है और प्रत्याशी अपने चंद्रमा के अनुसार ही मुहूर्त निकाल रहे हैं।
हर व्यक्ति परखता है अपना भाग्य : नरेंद्र
इस बारे में शास्त्री जयगोपाल शर्मा व शास्त्री नरेंद्र शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारी धार्मिक परंपरा है कि जब भी कोई शुभ कार्य करना होता है तो उसके लिए सबसे पहले उस व्यक्ति का चंद्रमा देखा जाता है, जो जिस कार्य को करना चाहता हो, उसके अनुसार ही उसके भाग्य का फैसला होता है। उन्होंने कहा कि वैसे तो हर प्रत्याशी यह मुहूर्त निकालता है, लेकिन जिस व्यक्ति का भाग्य प्रबल होता है और औरों से ज्यादा मजबूत होता है उसकी विजय निश्चित होती है। उन्होंने भी माना कि हर व्यक्ति अपने भाग्य को परखता है और भाग्य के अनुसार ही कार्य करता है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इन बातों पर विश्वास नहीं करते लेकिन, जब समय बुरा आता है तो उन्हें भी इस पर विश्वास करना पड़ता है।
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हर व्यक्ति परखता है अपना भाग्य : नरेंद्र
इस बारे में शास्त्री जयगोपाल शर्मा व शास्त्री नरेंद्र शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारी धार्मिक परंपरा है कि जब भी कोई शुभ कार्य करना होता है तो उसके लिए सबसे पहले उस व्यक्ति का चंद्रमा देखा जाता है, जो जिस कार्य को करना चाहता हो, उसके अनुसार ही उसके भाग्य का फैसला होता है। उन्होंने कहा कि वैसे तो हर प्रत्याशी यह मुहूर्त निकालता है, लेकिन जिस व्यक्ति का भाग्य प्रबल होता है और औरों से ज्यादा मजबूत होता है उसकी विजय निश्चित होती है। उन्होंने भी माना कि हर व्यक्ति अपने भाग्य को परखता है और भाग्य के अनुसार ही कार्य करता है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इन बातों पर विश्वास नहीं करते लेकिन, जब समय बुरा आता है तो उन्हें भी इस पर विश्वास करना पड़ता है।
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