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Mandi News: 36 प्रशिक्षुओं ने सीखा स्वयं सहायता समूहों का बेहतर प्रबंधन
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सब्जी उत्पादन की संभावनाओं से अवगत करवाया
सुंदरनगर (मंडी)। कृषक प्रशिक्षण केंद्र सुंदरनगर में शनिवार को जाइका परियोजना जिला इकाई हमीरपुर के सौजन्य से ‘स्वयं सहायता समूहों में भूमिका और जिम्मेदारियां’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण परियोजना (चरण-दो) के तहत आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जिलों के 36 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
प्रशिक्षण संयोजक डॉ. सुधीर ने प्रतिभागियों को परियोजना के उद्देश्यों और सब्जी उत्पादन की संभावनाओं से अवगत करवाया। सेवानिवृत्त उपनिदेशक कृषि डॉ. रवि शर्मा, प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. नरेश कुमार और डॉ. अमर सिंह कौंडल ने समूहों के गठन, बचत, बैंक खाता संचालन, नेतृत्व विकास और विवाद समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।
शिविर में बैठकों के आयोजन, दस्तावेजों के रखरखाव, पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षुओं को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और डिजिटलीकरण की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याएं और अनुभव भी साझा किए। अंत में केंद्र के उपप्रधानाचार्य डॉ. जगदीश कुमार ने प्रशिक्षुओं से संवाद कर फीडबैक लिया और सभी का आभार व्यक्त किया।
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सुंदरनगर (मंडी)। कृषक प्रशिक्षण केंद्र सुंदरनगर में शनिवार को जाइका परियोजना जिला इकाई हमीरपुर के सौजन्य से ‘स्वयं सहायता समूहों में भूमिका और जिम्मेदारियां’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण परियोजना (चरण-दो) के तहत आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जिलों के 36 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
प्रशिक्षण संयोजक डॉ. सुधीर ने प्रतिभागियों को परियोजना के उद्देश्यों और सब्जी उत्पादन की संभावनाओं से अवगत करवाया। सेवानिवृत्त उपनिदेशक कृषि डॉ. रवि शर्मा, प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. नरेश कुमार और डॉ. अमर सिंह कौंडल ने समूहों के गठन, बचत, बैंक खाता संचालन, नेतृत्व विकास और विवाद समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।
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शिविर में बैठकों के आयोजन, दस्तावेजों के रखरखाव, पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षुओं को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और डिजिटलीकरण की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याएं और अनुभव भी साझा किए। अंत में केंद्र के उपप्रधानाचार्य डॉ. जगदीश कुमार ने प्रशिक्षुओं से संवाद कर फीडबैक लिया और सभी का आभार व्यक्त किया।
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