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श्रीनाग देव हुंगलू के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में उमड़े श्रद्धालु
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:07 PM IST
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करसोग (मंडी)। उपमंडल के च्वासी क्षेत्र के खन्योल गांव में श्रीनाग देव हुंगलू के नए मंदिर का प्रतिष्ठा कार्यक्रम, यज्ञ विधि विधान के साथ आयोजित हो गया। इस अवसर पर करसोग क्षेत्र की अनेक देव समितियों ने भाग लिया। दो दिनों तक चले इस प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिष्ठित समाजसेवी मान सिंह ठाकुर ने शिरकत की। उन्होंने हुंगलू मंदिर की प्रतिष्ठा यज्ञ में पूर्णाहुति डालने के बाद कहा कि इस मंदिर की कलात्मकता निश्चित रूप से हमारी समृद्ध और विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत को अभिव्यक्त करती है। मंदिर समिति के प्रधान के नेतृत्व में सुरुचिपूर्ण ढंग से किया गया शिल्पकार्य निश्चय ही सम्मोहक तो है ही, भविष्य की पीढ़ी के लिए एक जीवंत कलात्मक विरासत भी है।
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इस प्रकार हुई मंदिर की प्रतिष्ठा
दो दिवसीय प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में युवा समाजसेवी टीसी ठाकुर ने बताया कि पहले दिन प्रात: यशवंत के नेतृत्व में फिरनू वासियों और नाग के जेरटा ने मीलों पैदल चलकर सतलुज नदी का पावन जल लाया। इस पावन जल से नाग हुंगलू जी का स्नान, पूजा-अर्चना की और नवनिर्मित कोठी एवं मंदिर भवन का प्रतिष्ठा कार्यक्रम शुरू हुआ। फिर इस भवन के शीर्ष पर दो विशाल कुरंडों की स्थापना कर शिखा फेर कार्य आयोजित हुआ। 10 दिसंबर को रात 3 बजे नाग हुंगलू के उत्पत्ति स्थल डींग मंदिर में पूजा पाठ कर वहां से देवता की बावड़ी का पावन जल लाकर तीसरे व मुख्य कुरंड की स्थापना प्रक्रिया का विधान कार्य शुरू हुआ। स्थापना कार्य के लिए पुजारी मंगतराम गुर पवन कुमार, काष्ठ शिल्पी धर्मदास व शेरसिंह ने इस भव्य स्मारक रूपी कोठी/मंदिर की ढलानदार छप्पर पर चढ़कर मंत्रोच्चारण के साथ वैदिक रीति से सदियों से चली आ रही परंपरा के आधार पर मुख्य कुरंड प्रतिष्ठा कार्य पूर्ण किया।
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सैकड़ों ने लिया देवता का आशीर्वाद
प्रतिष्ठा के बाद सैकड़ों क्षेत्र वासियों ने नाग हुंगलू की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। देव भवन प्रतिष्ठा कार्य के सुख-शांति पूर्वक संपन्न होने के अवसर पर देव रथ नृत्य ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। इस प्रतिष्ठा कार्य में फिल्लौर सिंह, फतेह सिंह, कारदार झाबेराम, भंडारी बालकराम, ठाकरुराम आदि ने सहयोग दिया। इस कार्यक्रम में एकत्रित च्वासी-सराज-करसोग क्षेत्र के भारी जन समूह के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
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इस प्रकार हुई मंदिर की प्रतिष्ठा
दो दिवसीय प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में युवा समाजसेवी टीसी ठाकुर ने बताया कि पहले दिन प्रात: यशवंत के नेतृत्व में फिरनू वासियों और नाग के जेरटा ने मीलों पैदल चलकर सतलुज नदी का पावन जल लाया। इस पावन जल से नाग हुंगलू जी का स्नान, पूजा-अर्चना की और नवनिर्मित कोठी एवं मंदिर भवन का प्रतिष्ठा कार्यक्रम शुरू हुआ। फिर इस भवन के शीर्ष पर दो विशाल कुरंडों की स्थापना कर शिखा फेर कार्य आयोजित हुआ। 10 दिसंबर को रात 3 बजे नाग हुंगलू के उत्पत्ति स्थल डींग मंदिर में पूजा पाठ कर वहां से देवता की बावड़ी का पावन जल लाकर तीसरे व मुख्य कुरंड की स्थापना प्रक्रिया का विधान कार्य शुरू हुआ। स्थापना कार्य के लिए पुजारी मंगतराम गुर पवन कुमार, काष्ठ शिल्पी धर्मदास व शेरसिंह ने इस भव्य स्मारक रूपी कोठी/मंदिर की ढलानदार छप्पर पर चढ़कर मंत्रोच्चारण के साथ वैदिक रीति से सदियों से चली आ रही परंपरा के आधार पर मुख्य कुरंड प्रतिष्ठा कार्य पूर्ण किया।
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सैकड़ों ने लिया देवता का आशीर्वाद
प्रतिष्ठा के बाद सैकड़ों क्षेत्र वासियों ने नाग हुंगलू की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। देव भवन प्रतिष्ठा कार्य के सुख-शांति पूर्वक संपन्न होने के अवसर पर देव रथ नृत्य ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। इस प्रतिष्ठा कार्य में फिल्लौर सिंह, फतेह सिंह, कारदार झाबेराम, भंडारी बालकराम, ठाकरुराम आदि ने सहयोग दिया। इस कार्यक्रम में एकत्रित च्वासी-सराज-करसोग क्षेत्र के भारी जन समूह के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
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