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वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच डाली चोला नाटी
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मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के तीसरे दिन देवयंत्रों की प्रतियोगिता और चोला नाटी आकर्षण का केंद्र रही। ऐतिहासिक पड्डल मैदान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की देवधुनों से सराबोर दिखा। स्वर लहरियों के बीच चोला नाटी से प्राचीन परंपरा की देवमयी झलक खूब बिखरी। मधुर शहनाइयों, करनाली, नरसिंघे ढोल नगाड़ों की लय में देव और मानस मिलकर खूब झूमे। बजंतरी प्रतियोगिता में पहले दिन स्नोर, बदार और सराज की 70 टीमों के प्रमुख देवी-देवताओं के कारदारों ने हिस्सा लिया। साढ़े बारह बजे के करीब देव वाद्य यंत्र प्रतियोगिता शुरू हुई। उसके बाद ढाई बजे के करीब देवलुओं ने देवों संग पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य कर मेले में पहुंचे लोगों को खूब आकर्षित किया। डीएलओ रेवती सेनी ने बताया कि 9 मार्च को देवलू नाटी होगी और उसका फानइल मुकाबला दस मार्च को होगा।
चोला नाटी में 170 ने लिया हिस्सा
पड्डल मैदान मंडी में देवलुओं की चोला नाटी प्रतियोगिता तीन वर्गों में आयोजित हुई। इसमें देवलु अपनी-अपनी वेशभूषा में नजर आए। इस मौके पर 170 से अधिक देवलुओं ने नाटी में हिस्सा लिया। डीएलओ ने बताया कि चोला नाटी में आठ टीमें मौजूद रहीं। सभी अपने चोले में नजर आए। सर्वदेवता समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा और सचिव युद्धवीर शर्मा ने बताया कि तीन वर्गों में देव नाटी का आयोजन किया गया।
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चोला नाटी में 170 ने लिया हिस्सा
पड्डल मैदान मंडी में देवलुओं की चोला नाटी प्रतियोगिता तीन वर्गों में आयोजित हुई। इसमें देवलु अपनी-अपनी वेशभूषा में नजर आए। इस मौके पर 170 से अधिक देवलुओं ने नाटी में हिस्सा लिया। डीएलओ ने बताया कि चोला नाटी में आठ टीमें मौजूद रहीं। सभी अपने चोले में नजर आए। सर्वदेवता समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा और सचिव युद्धवीर शर्मा ने बताया कि तीन वर्गों में देव नाटी का आयोजन किया गया।
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