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11 साल से लटका पजौंड़ी पेयजल योजना का काम

Updated Mon, 15 Jan 2018 10:09 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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पधर (मंडी)। क्षेत्र की करीब 15 पंचायतों के लोगों को पेयजल देने के लिए बनाई जा रही योजना पजौंड़ी का निर्माण कार्य माकूल बजट होने के बाद भी लटका हुआ है। यह कार्य पिछले 11 वर्षों से अधर में लटका पड़ा है। इस योजना के तैयार होने पर पधर और सदर उपमंडल की झटिंगरी, उरला, चुक्कू, गवाली, डलाह, सियुन, कुन्नू, पाली, सिलग, तरयांबली, कटिंडी, टांडू, बड़ीधार, भड़वाहण, कुफरी आदि पंचायतें लाभान्वित होनी हैं। वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की उपस्थिति में इस महत्वाकांक्षी योजना की पधर में आधारशिला रखी थी। इस दौरान योजना के कार्य को पूरा करने के लिए 13.61 करोड़ रुपये के बजट का विभाग ने प्रावधान रखा था। योजना कार्य में हुई देरी के चलते अब योजना का विभागीय बजट 22 करोड़ से ऊपर चला गया है। विभाग ने योजना के कार्य को सिरे चढ़ाने के मकसद से करोड़ों रुपये की पाइपों की खरीदारी की है, वहीं, बधौणीधार में करोड़ों रुपये की लागत से विशाल पेयजल भंडारण और फिल्टर टैंकों का भी निर्माण कर डाला। योजना का पानी चौहारघाटी के पजौंड़ नाला से लिफ्ट होना था। इस दौरान चौहारघाटी का अधिकांश एरिया सेंक्चुरी एरिया में होने के चलते योजना के कार्य में सुप्रीम कोर्ट से अनुमति न लेने की जद में मामला खटाई में पड़ गया। आज भी सेंक्चुरी एरिया में बिछने वाली पाइपें कार्य खटाई में पड़ने के कारण सड़क के किनारे हवा में जंग खा रही हैं। भंडारण टैंक से आगे संबंधित पंचायतों को होने वाली सप्लाई लाइनें भी विभाग की ओर से वर्षों पूर्व बिछा दी गई हैं, जो मिट्टी के नीचे जंग खा रही हैं। वर्ष 2008 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने और धूमल सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना के कार्य में पूरे पांच वर्ष कोई प्रगति सामने नहीं आई। पिछले पांच वर्ष के कार्यकाल में स्थानीय विधायक पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने चौहारघाटी क्षेत्र को सेंक्चुरी एरिया से बाहर करने के उपरांत योजना के कार्य में बजट में बेशक बढ़ोतरी की, मगर पेयजल योजना का कार्य आज दिन तक कोई रफ्तार नहीं पकड़ सका।
क्या है विवाद
पेयजल योजना का पानी पजौंड़ नाला से उठना है, जहां लोगों के घराट हैं। स्थानीय लोगों ने इस मसले को कोर्ट में उठाया। इस दौरान सेंक्चुरी एरिया में योजना का कार्य करने की अनुमति न लेना कानूनी पेच बना और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से उलझता रहा। इस दिशा में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने सभी औपचारिकताएं जनहित में अब पूरी कर ली हैं और मामला एफआरए क्लीयरेंस को चला गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी और विधायक
अधिशासी अभियंता उपेंद्र वैद्य ने कहा कि योजना के कार्य को सिरे चढ़ाने के लिए विभाग ने सभी प्रकार की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। एफआरए के तहत वन विभाग से एनओसी मिलना रह गई है। योजना के टेंडर अवार्ड हो चुके हैं। एनओसी मिलते ही योजना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उधर, विधायक जवाहर ठाकुर ने कहा कि पजौंड़ी पेयजल योजना के विलंब के पीछे क्या कारण रहे हैं, इस संदर्भ में वह शीघ्र विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए जो भी संभव होगा, उस दिशा में प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के समक्ष भी इस मसले को उठाएंगे।

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