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मौत के बाद निगम कर्मी के परिजनों को मिलेगा सेवा लाभ
Updated Fri, 22 Jun 2018 10:41 PM IST
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मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने परिवहन निगम को सेवानिवृत्त कर्मी की मौत के बाद उसके परिजनों के पक्ष में सेवा संबंधी लाभ 3 माह में अदा करने का फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य डीके शर्मा ने एचआरटीसी सुंदरनगर में मेकेनिक धर्म सिंह के उत्तराधिकारी कृष्णा देवी, नीतू देवी और पवन कुमार की याचिका को स्वीकारते हुए यह फैसला सुनाया है। अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिका के अनुसार याचिकाकर्ताओं का मामला ट्रिब्यूनल द्वारा सावित्री देवी बनाम एचआरटीसी मामले में दी गई व्यवस्था के अंतर्गत आता है। ट्रिब्यूनल ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को निर्देश जारी किए हैं कि अगर याचिकाकर्ताओं का मामला उक्त व्यवस्था के आदेश के अंतर्गत आता है तो उन्हें मृतक कर्मी के सेवा संबंधी लाभ तीन माह में जारी किए जाएं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार मेकेनिक धर्म सिंह सेवा अवधि में काम करते समय दुर्घटनाग्रस्त होकर अक्षम हो गया था। इस अक्षमता के कारण उन्हें निगम से मेडिकल आधार पर सेवानिवृत्त कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं की यह थी दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कर्मी के अक्षम हो जाने के बाद यह विभाग का कर्तव्य था कि वह कर्मी को उसके कानूनी अधिकारों के बारे में बताते और उसे कोई वैकल्पिक कार्य मुहैया करवाते। लेकिन, विभाग ने वैकल्पिक कार्य देने के बजाय कर्मी को सेवानिवृत्त कर दिया था। हालांकि कर्मी ने इस सेवानिवृत्ति के खिलाफ विभाग को ज्ञापन दिया था। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके चलते ट्रिब्यूनल में यह याचिका दायर की गई थी। ट्रिब्यूनल ने याचिका को स्वीकारते हुए निगम को इस मामले में 3 माह के भीतर कार्रवाई करके सभी सेवा संबंधी लाभ देने का फैसला सुनाया है।
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याचिकाकर्ताओं की यह थी दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कर्मी के अक्षम हो जाने के बाद यह विभाग का कर्तव्य था कि वह कर्मी को उसके कानूनी अधिकारों के बारे में बताते और उसे कोई वैकल्पिक कार्य मुहैया करवाते। लेकिन, विभाग ने वैकल्पिक कार्य देने के बजाय कर्मी को सेवानिवृत्त कर दिया था। हालांकि कर्मी ने इस सेवानिवृत्ति के खिलाफ विभाग को ज्ञापन दिया था। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके चलते ट्रिब्यूनल में यह याचिका दायर की गई थी। ट्रिब्यूनल ने याचिका को स्वीकारते हुए निगम को इस मामले में 3 माह के भीतर कार्रवाई करके सभी सेवा संबंधी लाभ देने का फैसला सुनाया है।
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