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मेडिकल कॉलेज नेरचौक को मिला अस्पताल भवन, 15 अप्रैल से शुरू होगी ओपीडी
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:12 PM IST
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मंडी/ नेरचौक। सूबे के मध्य जोन के हजारों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से ईएसआईसी और मेडिकल कॉलेज नेरचौक प्रबंधन के बीच चल रही भवन अधिग्रहण की उलझन के बीच 11 ब्लॉक वीरवार को मेडिकल कॉलेज को मिल गए हैं। इन 11 ब्लॉकों में एक ब्लॉक अस्पताल भवन का है। जिससे अब अस्पताल में 15 अप्रैल तक यहां पर लोगों को इलाज की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की अप्रैल के शुरू में ही ओपीडी शुरू करने की योजना थी। लेकिन, भवन मिलने में देरी और अब लैब और एक्सरे की सुविधा न होने से 15 अप्रैल तक ही इलाज की सुविधा यहां पर शुरू होने की उम्मीद है। वर्तमान में मंडी जोनल अस्पताल से मेडिकल कॉलेज अटैच है। बुधवार को ईएसआईसी टीम ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को कुल 11 ब्लाक सौंपे हैं। इसमें अस्पताल भवन की बेसमेट, ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर और पांचवां फ्लोर शामिल है। इन ब्लाकों में ओपीडी, बल्ड बैंक, वार्ड इत्यादि चलाए जाएंगे। अब जोनल अस्पताल मंडी से भी मरीजों का भार कम हो जाएगा। वहीं, लंबे अरसे से मेडिकल कॉलेज में इलाज की राह देखकर प्रदेश के मध्य जोन के कई जिलों के लोगों को सुविधा मिलेगी।
इन जिलों को मिलेगी सुविधाएं
मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, लाहौल स्पीति समेत मंडी से सटे कांगड़ा क्षेत्र के लोगों को यहां पर इलाज की सुविधा मिलेगी। बुधवार को इंटेरिम ब्लॉक, टाइप टू रेजिडेंशियल ब्लॉक ए, सी, डी, टाइप थ्री रेजिडेंशियल ब्लॉक सी एवं डी, टाइप फोर रेजिडेंशियल ब्लॉक क्वार्टर डी, एफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट, कामर्शियल ब्लॉक, रेजिडेंशियल डाक्टर हॉस्टल, अंडर ग्राउंड टैंक, इंनसीनेटर ब्लॉक, तीमारदारों के ठहरने वाले ब्लॉक को मेडिकल कॉलेज ने अपने अधीन कर लिया है।
इस्तेमाल होगा गंदा पानी
मेडिकल कॉलेज के एफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट में गंदे पानी को इस्तेमाल योग्य बनाया जा सकेगा। इससे पानी की बचत होगी। इस तरह का प्रदेश में यह पहला प्लांट होगा। इससे गंदे पानी को इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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15 अप्रैल तक शुरू होगी ओपीडी : डीन
लाल बहादुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. डीएस धीमान ने कहा कि अस्पताल ब्लॉक समेत 11 भवन ईएसआईसी ने कॉलेज को सौंप दिए है। अब 15 अप्रैल तक कॉलेज में ओपीडी शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सरे और लैब अस्पताल भवन में स्थापित किए जाने बाकी है। इसके बाद ओपीडी शुरू की जाएगी।
यह फंसा था पेच
ईएसआईसी जल्द से जल्द सारे भवनों को हिमाचल सरकार को सौंप कर भवनों के रखरखाव समेत अन्य खर्चों से पीछे हटना चाहता था। जैसे ही ईएसआईसी सारे भवनों को हिमाचल सरकार को सौंप देगा ईएसआईसी का दायित्व पूरा हो जाएगा। अभी तक बिजली, पानी, सुरक्षा एजेंसी जैसे कार्य ईएसआईसी वहन कर रही है। वहीं, निर्माण कार्य कर रही एनबीसीसी कंपनी के लिए दुविधा यह है कि जब तक सारी बिल्डिंग हिमाचल सरकार को नहीं दी जाती, तब तक उसका कार्य पूर्ण नहीं हो रहा है। इसके पीछे यह तर्क भी है कि भवनों को सौंपने के बाद भी 1 वर्ष तक उनके रखरखाव का कार्य एनबीसीसी कंपनी को करना है। जिस कारण कंपनी भवनों को जल्द सरकार को सौंपना चाहती है। लेकिन, सरकार भी अपनी जरूरत और खर्चों का समन्वय बनाकर भवनों को अंडरटेक कर रही है।
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इन जिलों को मिलेगी सुविधाएं
मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, लाहौल स्पीति समेत मंडी से सटे कांगड़ा क्षेत्र के लोगों को यहां पर इलाज की सुविधा मिलेगी। बुधवार को इंटेरिम ब्लॉक, टाइप टू रेजिडेंशियल ब्लॉक ए, सी, डी, टाइप थ्री रेजिडेंशियल ब्लॉक सी एवं डी, टाइप फोर रेजिडेंशियल ब्लॉक क्वार्टर डी, एफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट, कामर्शियल ब्लॉक, रेजिडेंशियल डाक्टर हॉस्टल, अंडर ग्राउंड टैंक, इंनसीनेटर ब्लॉक, तीमारदारों के ठहरने वाले ब्लॉक को मेडिकल कॉलेज ने अपने अधीन कर लिया है।
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इस्तेमाल होगा गंदा पानी
मेडिकल कॉलेज के एफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट में गंदे पानी को इस्तेमाल योग्य बनाया जा सकेगा। इससे पानी की बचत होगी। इस तरह का प्रदेश में यह पहला प्लांट होगा। इससे गंदे पानी को इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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15 अप्रैल तक शुरू होगी ओपीडी : डीन
लाल बहादुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. डीएस धीमान ने कहा कि अस्पताल ब्लॉक समेत 11 भवन ईएसआईसी ने कॉलेज को सौंप दिए है। अब 15 अप्रैल तक कॉलेज में ओपीडी शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सरे और लैब अस्पताल भवन में स्थापित किए जाने बाकी है। इसके बाद ओपीडी शुरू की जाएगी।
यह फंसा था पेच
ईएसआईसी जल्द से जल्द सारे भवनों को हिमाचल सरकार को सौंप कर भवनों के रखरखाव समेत अन्य खर्चों से पीछे हटना चाहता था। जैसे ही ईएसआईसी सारे भवनों को हिमाचल सरकार को सौंप देगा ईएसआईसी का दायित्व पूरा हो जाएगा। अभी तक बिजली, पानी, सुरक्षा एजेंसी जैसे कार्य ईएसआईसी वहन कर रही है। वहीं, निर्माण कार्य कर रही एनबीसीसी कंपनी के लिए दुविधा यह है कि जब तक सारी बिल्डिंग हिमाचल सरकार को नहीं दी जाती, तब तक उसका कार्य पूर्ण नहीं हो रहा है। इसके पीछे यह तर्क भी है कि भवनों को सौंपने के बाद भी 1 वर्ष तक उनके रखरखाव का कार्य एनबीसीसी कंपनी को करना है। जिस कारण कंपनी भवनों को जल्द सरकार को सौंपना चाहती है। लेकिन, सरकार भी अपनी जरूरत और खर्चों का समन्वय बनाकर भवनों को अंडरटेक कर रही है।