{"_id":"5cc9d2d0bdec2207664947b5","slug":"101556730576-mandi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम का मिजाज यूं रहा तो इस बार गुच्छी करेगी मालामाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम का मिजाज यूं रहा तो इस बार गुच्छी करेगी मालामाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौसम का मिजाज ऐसे ही रहा तो
इस बार गुच्छी करेगी मालामाल
कसरोग के लोगों में बंधी गुच्छी का सीजन अच्छा रहने की उम्मीद
जंगलों में अप्रैल से जून तक पाई जाती है औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी
15000 से 18000 रुपये प्रति किलोग्राम है गुच्छी है थोक भाव
धर्मवीर गौतम
करसोग (मंडी)। अगर इस बार आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज यूं ही रहा तो औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी लोगों को खूूब मालामाल करेगी। मई माह में हो रही बारिश से वन क्षेत्र के समीप रहने वाले लोगों को गुच्छी के अच्छे सीजन की उम्मीद बंधी हुई है। क्योंकि इस महंगी औषधीय सब्जी के लिए पर्याप्त नमी बारिश से मिल रही है। गुच्छी अप्रैल से जून माह के मध्य पाई जाती है। आकलन के अनुसार विश्व भर में प्रति वर्ष 150 टन सूखी गुच्छियों का उत्पादन होता है।
फफूंद प्रजाति से संबंध रखने वाली यह गुच्छी अधिकांश जंगलों में ही पाई जाती है। गुच्छी के व्यापारी रहे धर्म पाल गुप्ता ने बताया कि स्वादिष्ट सब्जी के रूप में प्रयुक्त होने वाली गुच्छी का व्यापार वन विभाग की अनुमति से ही किया जाता है। परचून में बिना ग्रेड की सूखी गुच्छी का भाव लगभग 7000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है, जबकि ग्रेड करने के बाद थोकभाव 15000 से 18000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
कई रोगों के लिए रामबाण है गुच्छी
विशेषज्ञ डॉ. जगदीश शर्मा का कहना है कि गुच्छी भूमि में घासफूस और छायादार नमीं वाले स्थानों पर अधिक फूटती है। एक स्थान पर एक से अधिक गुच्छियां भी फूटती हैं पर अकेली गुच्छी कम देखी जाती है। उन्होंने बताया कि गुच्छी औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें ऊर्जा, प्रोटीन, पोटैशियम, आयरन आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यह सूजनरोधी, दिल के दौरों से मानव को सुरक्षा प्रदान करने वाली, थकान हरने वाली, प्रोस्टेट और स्तन कैंसर की संभावना तथा मानव शरीर में पाए जाने वाले हानिकारक प्रभावों को कम करने वाली होती है। गुच्छी में प्रोटीन की काफी अधिक मात्रा होती है। बागवानी निदेशालय शिमला में कार्यरत वैज्ञानिक डॉक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि समुद्रतल से 1800 से 3600 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाने वाली गुच्छी में प्रोटीन की काफी अधिक मात्रा पाई जाती है। इसके अतिरिक्त अपने अलग स्वाद के लिए जाने जानी वाली इस फफूंद प्रजाति में खनिज पदार्थ भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गुच्छी को भोजन के रूप में इस्तेमाल करने के अलावा इसे दवाइयां बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। इन दिनों नमी प्रयुक्त है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस बार गुच्छी करेगी मालामाल
कसरोग के लोगों में बंधी गुच्छी का सीजन अच्छा रहने की उम्मीद
जंगलों में अप्रैल से जून तक पाई जाती है औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी
15000 से 18000 रुपये प्रति किलोग्राम है गुच्छी है थोक भाव
धर्मवीर गौतम
करसोग (मंडी)। अगर इस बार आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज यूं ही रहा तो औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी लोगों को खूूब मालामाल करेगी। मई माह में हो रही बारिश से वन क्षेत्र के समीप रहने वाले लोगों को गुच्छी के अच्छे सीजन की उम्मीद बंधी हुई है। क्योंकि इस महंगी औषधीय सब्जी के लिए पर्याप्त नमी बारिश से मिल रही है। गुच्छी अप्रैल से जून माह के मध्य पाई जाती है। आकलन के अनुसार विश्व भर में प्रति वर्ष 150 टन सूखी गुच्छियों का उत्पादन होता है।
फफूंद प्रजाति से संबंध रखने वाली यह गुच्छी अधिकांश जंगलों में ही पाई जाती है। गुच्छी के व्यापारी रहे धर्म पाल गुप्ता ने बताया कि स्वादिष्ट सब्जी के रूप में प्रयुक्त होने वाली गुच्छी का व्यापार वन विभाग की अनुमति से ही किया जाता है। परचून में बिना ग्रेड की सूखी गुच्छी का भाव लगभग 7000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है, जबकि ग्रेड करने के बाद थोकभाव 15000 से 18000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
विज्ञापन
कई रोगों के लिए रामबाण है गुच्छी
विशेषज्ञ डॉ. जगदीश शर्मा का कहना है कि गुच्छी भूमि में घासफूस और छायादार नमीं वाले स्थानों पर अधिक फूटती है। एक स्थान पर एक से अधिक गुच्छियां भी फूटती हैं पर अकेली गुच्छी कम देखी जाती है। उन्होंने बताया कि गुच्छी औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें ऊर्जा, प्रोटीन, पोटैशियम, आयरन आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यह सूजनरोधी, दिल के दौरों से मानव को सुरक्षा प्रदान करने वाली, थकान हरने वाली, प्रोस्टेट और स्तन कैंसर की संभावना तथा मानव शरीर में पाए जाने वाले हानिकारक प्रभावों को कम करने वाली होती है। गुच्छी में प्रोटीन की काफी अधिक मात्रा होती है। बागवानी निदेशालय शिमला में कार्यरत वैज्ञानिक डॉक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि समुद्रतल से 1800 से 3600 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाने वाली गुच्छी में प्रोटीन की काफी अधिक मात्रा पाई जाती है। इसके अतिरिक्त अपने अलग स्वाद के लिए जाने जानी वाली इस फफूंद प्रजाति में खनिज पदार्थ भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गुच्छी को भोजन के रूप में इस्तेमाल करने के अलावा इसे दवाइयां बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। इन दिनों नमी प्रयुक्त है।
विज्ञापन