कराहते पहाड़: आपदा से स्याठी गांव के 20 परिवारों के पास कुछ नहीं बचा, सुरक्षित जमीन मुहैया करवाने की मांग
Mandi Disaster: 30 जून की रात को हुए भारी भूस्खलन के बाद स्याठी गांव आज भी मलबे का ढेर बना हुआ है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब वे अपने ढहे हुए घरों को देखते हैं तो आंखों से आंसू थमते नहीं। पढ़ें पूरी खबर...
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धर्मपुर उपमंडल की लौंगणी पंचायत का स्याठी गांव 30 जून की रात को हुए भारी भूस्खलन के बाद आज भी मलबे का ढेर बना हुआ है। इस आपदा में 20 परिवार पलभर में बेघर हो गए। हादसे के बाद कई दिन तक लोग त्रैम्बलाधार मंदिर में राहत कैंप में रहे। स्थानीय लोगों ने भी हरसंभव मदद की। अब परिवार किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं। कुछ सज्याओपिपलु, कुछ जोढन और कुछ लौंगणी में हैं।
आपदा के तुरंत बाद सरकार और नेताओं ने प्रभावितों से मुलाकात कर जल्द सुरक्षित जमीन देने का आश्वासन दिया था लेकिन तीन महीने बाद भी जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब वे अपने ढहे हुए घरों को देखते हैं तो आंखों से आंसू थमते नहीं।

गांव की आपदा समिति की सचिव नीलम कुमारी और सदस्य स्निचरू, डमणु राम, धनीराम, हलकु राम, गुरदीता, विशाल, रजनीश, देशराज, संतोष कुमार, ब्रह्मदास, रवि कुमार, दीप कुमार, संजय कुमार, जय सिंह, कृष्ण चंद, अशोक कुमार, ललित और कर्मदास का कहना है कि हम अपने घरों में हंसी-खुशी रहते थे पर अब सब कुछ खत्म हो गया। भगवान की मर्जी को कोई रोक नहीं सकता लेकिन सरकार हमारी मदद कर सकती है। मांग सिर्फ इतनी है कि हमें सुरक्षित जगह पर बसाया जाए ताकि फिर ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
स्याठी गांव में करीब 20 परिवार प्रभावित हुए हैं। सात घरों का नामोनिशान मिट गया है, अन्य क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालात यह हैं कि यह मलबे के ढेर और खाइयां बनी हुई हैं। बचे हुए घर असुरक्षित हो गए हैं। यहां तक पहुंचना भी अब खतरे से खाली नहीं है।