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कराहते पहाड़: आपदा से स्याठी गांव के 20 परिवारों के पास कुछ नहीं बचा, सुरक्षित जमीन मुहैया करवाने की मांग

Sun, 05 Oct 2025 11:33 AM IST
अंकेश डोगरा सुशील शर्मा, धर्मपुर (मंडी)।
सुशील शर्मा, धर्मपुर (मंडी)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 05 Oct 2025 11:33 AM IST
सार

Mandi Disaster: 30 जून की रात को हुए भारी भूस्खलन के बाद स्याठी गांव आज भी मलबे का ढेर बना हुआ है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब वे अपने ढहे हुए घरों को देखते हैं तो आंखों से आंसू थमते नहीं। पढ़ें पूरी खबर...

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Mandi Disaster Syathi village lies in a pile of rubble government promises unfulfilled, demand for safe land
धर्मपुर का स्याठी गांव जो अब मलबे की ढेर में तब्दील हो गया है। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

धर्मपुर उपमंडल की लौंगणी पंचायत का स्याठी गांव 30 जून की रात को हुए भारी भूस्खलन के बाद आज भी मलबे का ढेर बना हुआ है। इस आपदा में 20 परिवार पलभर में बेघर हो गए। हादसे के बाद कई दिन तक लोग त्रैम्बलाधार मंदिर में राहत कैंप में रहे। स्थानीय लोगों ने भी हरसंभव मदद की। अब परिवार किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं। कुछ सज्याओपिपलु, कुछ जोढन और कुछ लौंगणी में हैं।

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आपदा के तुरंत बाद सरकार और नेताओं ने प्रभावितों से मुलाकात कर जल्द सुरक्षित जमीन देने का आश्वासन दिया था लेकिन तीन महीने बाद भी जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब वे अपने ढहे हुए घरों को देखते हैं तो आंखों से आंसू थमते नहीं।

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गांव की आपदा समिति की सचिव नीलम कुमारी और सदस्य स्निचरू, डमणु राम, धनीराम, हलकु राम, गुरदीता, विशाल, रजनीश, देशराज, संतोष कुमार, ब्रह्मदास, रवि कुमार, दीप कुमार, संजय कुमार, जय सिंह, कृष्ण चंद, अशोक कुमार, ललित और कर्मदास का कहना है कि हम अपने घरों में हंसी-खुशी रहते थे पर अब सब कुछ खत्म हो गया। भगवान की मर्जी को कोई रोक नहीं सकता लेकिन सरकार हमारी मदद कर सकती है। मांग सिर्फ इतनी है कि हमें सुरक्षित जगह पर बसाया जाए ताकि फिर ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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लौंगणी पंचायत की प्रधान मीना देवी, उपप्रधान पृथी सिंह और पूर्व प्रधान देशराज पालसरा ने भी प्रभावित परिवारों की पीड़ा सरकार तक पहुंचाई है। उनका कहना है कि लोग महीनों से किराये के मकानों में रह रहे हैं। इसलिए जल्द से जल्द इन्हें जमीन आवंटित की जाए ताकि वे अपने नए घर बना सकें।

सात घरों का नामोनिशान मिटा, कई क्षतिग्रस्त
स्याठी गांव में करीब 20 परिवार प्रभावित हुए हैं। सात घरों का नामोनिशान मिट गया है, अन्य क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालात यह हैं कि यह मलबे के ढेर और खाइयां बनी हुई हैं। बचे हुए घर असुरक्षित हो गए हैं। यहां तक पहुंचना भी अब खतरे से खाली नहीं है।
 

आपदा के बीच सब कुछ छूट गया है। अब किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन और शासन से यही आग्रह है कि तुरंत सुरक्षित जमीन दी जाए। - ललित कुमार, प्रभावित


 

एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाया था। इस त्रासदी ने सब कुछ तबाह कर दिया है। सरकार पर आश्रित हैं कि कब जैसे जमीन मिलेगी। - हलकु राम, प्रभावित
 

स्याठी गांव की तरफ देखते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। इस गांव में लंबा अरसा बीता है। सभी ग्रामीणों को एक सुरक्षित जगह पर सरकार बसाए। - राजो देवी, प्रभावित
 

त्रासदी ने हंसती खेलती जिंदगी में सब कुछ उथल-पुथल कर दिया है। कभी नहीं सोचा था कि दर-दर ठोकरें खानी पड़ेंगी। सरकार से जमीन मिलने की उम्मीद है।- जुलमी देवी, प्रभावित


 

प्रभावितों को पुनर्वासित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। एफआरसी कमेटी से जमीन की स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्यवाही उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। प्रशासन प्रयासरत है कि जल्द इस कार्य को पूरा किया जाए। -जोगिंद्र पटियाल, एसडीएम धर्मपुर 
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