लाहौल में सूखे से मटर की फसल बर्बाद
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लाहौल घाटी में किसान-बागवान सूखे की मार झेल रहे हैं। बारिश को लेकर लोग देवी हिडिंबा, अठारह नाग और राजा घेपन सहित अपने-अपने इष्ट देवताओं की शरण में जाकर बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। बारिश के नहीं होने से किसान बागवानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मटर के बाद अब गोभी की फसल और आलू पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसी वर्ष सर्दी में कम बर्फबारी और समय पर बारिश के नहीं होने से पट्टन घाटी के कई क्षेत्रों में मटर की फसल सूखे से बर्बाद हो गई है। ऐसा ही रहा तो किसान मटर बीज की कीमत भी नहीं निकाल पाएंगे।
लाहौल की 90 फीसदी आबादी कृषि पर ही निर्भर है। रोजमर्रा की वस्तुओं से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक के सब खर्चे कृषि पर ही निर्भर है, लेकिन पट्टन घाटी के कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। घाटी के शांशा, चेवर, डेल्डा, बारिंग, सिंदवाडी और कुकुमसेरी सहित कई क्षेत्रों में मटर की फसलें सूखे से बर्बाद होने की सूचना है। किसान सुरेश कुमार, श्याम लाल, गोविंद और राकेश के अनुसार सूखे से 40 फीसदी तक मटर की फसल बर्बाद हो गई है।
लाहौल घाटी की कृषि सर्दियों के दिनों पड़ने वाली बर्फ पर अधिक निर्भर रहतीे है। इस वर्ष बीती सर्दी में कम बर्फबारी और इस समय बारिश नहीं होने से हालात बिगड़ गए हैं। बारिश के नहीं होने से सेब की फसल पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। इधर, बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ सोनम ने बताया कि लाहौल घाटी में कृषि बागवानी सर्दियों के दिनों पड़ने वाली बर्फबारी पर अधिक निर्भर रहती है, जो गर्मियों के दिनों पहाड़ों से रिसकर गर्मियों के दिनों फसल सिंचाई के काम आती है।