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Agriculture: हिमाचल प्रदेश में यूरिया खाद पहुंची, हिमफेड भी करा रहा उपलब्ध; पर म्यूरेट ऑफ पोटाश की किल्लत
Sun, 01 Mar 2026 11:30 AM IST
Ankesh Dogra
राजीव नैय्यर, कुल्लू।
राजीव नैय्यर, कुल्लू।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:30 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में यूरिया खाद हाथोंहाथ बिक रही है। किसानों और बागवानों के लिए इफको विक्रय केंद्र में खाद उपलब्ध है और इसे हिमफेड भी उपलब्ध करवा रहा है, लेकिन म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद की किल्लत हो गई है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में यूरिया खाद तो पर्याप्त मात्रा में पहुंच गई है और हाथोंहाथ बिक रही है, मगर म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद की किल्लत हो गई है। म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद सेब के पौधों के लिए जरूरी है।
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कुल्लू यूरिया खाद की 30 हजार बोरियां हाथोंहाथ बिक गईं तो पूरे प्रदेश में भी इस खाद की खूब मांग है। किसानों और बागवानों के लिए इफको विक्रय केंद्र में खाद उपलब्ध है और इसे हिमफेड भी उपलब्ध करवा रहा है। राज्य के 12 जिलों के लिए आई यूरिया की खेप हाथोंहाथ बिकना शुरू हो गई है।
इफको के विक्रय केंद्रों पर यूरिया खाद की खेप उपलब्ध है और किसान-बागवान इसे हाथोंहाथ खरीद रहे हैं। प्रदेश में चार माह के सूखे के बाद विगत जनवरी के अंतिम सप्ताह में बारिश और बर्फबारी हुई थी। इसके बाद से किसानों-बागवानों ने कृषि-बागवानी के कार्यों को तेज कर दिया है। ऐसे में यूरिया खाद की डिमांड लगातार बढ़ रही थी।
इफको के विक्रय केंद्रों पर यूरिया खाद की खेप उपलब्ध है और किसान-बागवान इसे हाथोंहाथ खरीद रहे हैं। प्रदेश में चार माह के सूखे के बाद विगत जनवरी के अंतिम सप्ताह में बारिश और बर्फबारी हुई थी। इसके बाद से किसानों-बागवानों ने कृषि-बागवानी के कार्यों को तेज कर दिया है। ऐसे में यूरिया खाद की डिमांड लगातार बढ़ रही थी।
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इफको ने डिमांड पर चंडीगढ़ से 53,000 बोरियां यूरिया खाद की मंगवाई हैं और इनका वितरण भी विक्रय केंद्रों पर आरंभ कर दिया है। गौरतलब है कि यूरिया खाद का उपयोग किसान खेतों और बागवान अपने बगीचों में करते हैं। रबी सीजन की फसलों और सब्जियों की बेहतर पैदावार के लिए करते हैं।
इसके अलावा बागवान सेब, प्लम के पेड़ों के तौलियों बनाते हुए करते है, ताकि फल सीजन में सेब और प्लम के साथ अन्य फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर हो सके। सर्दी के मौसम में यूरिया की डिमांड अधिक रहती है। वहीं, इफको ने किसानों-बागवानों को समय पर यूरिया खाद उपलब्ध करवाई है। इससे उनकी खाद संबंधी परेशानी कम हुई है। इफको के फील्ड अधिकारी रोहित गलोटिया ने कहा कि जनवरी और फरवरी माह में हुई बारिश-बर्फबारी से मौसम कृषि-बागवानी के कार्यों के लिए अनुकूल बना हुआ है।
किसानों-बागवानों को यूरिया खाद के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए इफको ने चंडीगढ़ से 53,000 बोरियों की खेप मंगवाई है। इसका वितरण हर जिला के लिए कर दिया गया है और इफको के विक्रय केंद्रों पर किसानों-बागवानों के लिए खाद उपलब्ध है। कहा कि अब तक 30,000 यूरिया खाद की बोरियों की किसानों-बागवानों ने खरीदारी कर दी है।
म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद 10 तक ही पहुंचेगी
म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद सेब के पौधों में डाली जाती है, मगर हिमफेड के स्टोरों में यह खत्म हो गई है। वहीं, हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर चौहान ने कहा है कि हिमाचल के लिए इस खाद के पूरे कोटे की आपूर्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इंडियन पोटाश लिमिटेड से 10 मार्च तक खाद की आपूर्ति संभावित है।
म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद सेब के पौधों में डाली जाती है, मगर हिमफेड के स्टोरों में यह खत्म हो गई है। वहीं, हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर चौहान ने कहा है कि हिमाचल के लिए इस खाद के पूरे कोटे की आपूर्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इंडियन पोटाश लिमिटेड से 10 मार्च तक खाद की आपूर्ति संभावित है।