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सत्य वही जो अपने आप में न बदले: सतपाल महाराज
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कुल्लू के रथ मैदान में सदभावना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे सतपाल महाराज के अनुया?
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। सत्य वही है जो अपने आप में बदल न सके। मानवता की मांग है कि मानव, मानव को समझे। विचार करो कि जब मानव को, मानव ही न समझे तो क्या मवेशी मानव को समझेंगे। यह बात रविवार को कुल्लू के रथ मैदान में हुए सद्भावना सम्मेलन में सतपाल महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि जैसा तुम अपने लिए चाहते हो वैसा ही दूसरों को समझें। अगर तुम सुखी रहना चाहते हो तो पड़ोसी को सुखी बनाओ। पड़ोसी को संपन्न बनाने में तुम्हारा नुकसान ही क्या है। अच्छाई कहीं भी हो, किसी देश या किसी जाति में हो, उसको ही लेना चाहिए। शरीर के दुखों और सुखों को तो पशु -पक्षी सभी जानते हैं, लेकिन जिस बात को या जिस ज्ञान को जानने के लिए ऐसा उत्तम शरीर मिला है। उसे जानना ही मनुष्यता है।
ऐसा दुर्लभ तन पाकर भी अगर उस सार को नहीं जाना तो यह जीवन व्यर्थ है। सद्गुरु के बिना जो कुछ भी मनुष्य शुभ कार्य करता है, उसमें उसका मन एकाग्र नहीं होता। इसलिए वह सब निष्फल है। गुरु उसी को कहते हैं जो मन को एकाग्र कर दे। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से आयोजित सद्भावना सम्मेलन में काफी अधिक संख्या में अनुयायियों ने हिस्सा लिया। तीन घंटों तक चले इस सम्मेलन में सामाजिक सौहार्द तथा सद्भावना के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान विभू महाराज, सुयश महाराज, माता अमृता, माता आराध्य, मोहिना, महात्मा स्वरूपा आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि जैसा तुम अपने लिए चाहते हो वैसा ही दूसरों को समझें। अगर तुम सुखी रहना चाहते हो तो पड़ोसी को सुखी बनाओ। पड़ोसी को संपन्न बनाने में तुम्हारा नुकसान ही क्या है। अच्छाई कहीं भी हो, किसी देश या किसी जाति में हो, उसको ही लेना चाहिए। शरीर के दुखों और सुखों को तो पशु -पक्षी सभी जानते हैं, लेकिन जिस बात को या जिस ज्ञान को जानने के लिए ऐसा उत्तम शरीर मिला है। उसे जानना ही मनुष्यता है।
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ऐसा दुर्लभ तन पाकर भी अगर उस सार को नहीं जाना तो यह जीवन व्यर्थ है। सद्गुरु के बिना जो कुछ भी मनुष्य शुभ कार्य करता है, उसमें उसका मन एकाग्र नहीं होता। इसलिए वह सब निष्फल है। गुरु उसी को कहते हैं जो मन को एकाग्र कर दे। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से आयोजित सद्भावना सम्मेलन में काफी अधिक संख्या में अनुयायियों ने हिस्सा लिया। तीन घंटों तक चले इस सम्मेलन में सामाजिक सौहार्द तथा सद्भावना के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान विभू महाराज, सुयश महाराज, माता अमृता, माता आराध्य, मोहिना, महात्मा स्वरूपा आदि मौजूद रहे।
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