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Kullu News: आठ साल बाद त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना ने किया शाही स्नान
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तीर्थ स्थल रूद्रनाग में देवता त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना ने किया शाही स्नान।
- फोटो : Kullu
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू के तहत आने वाले तीर्थ स्थल रूद्रनाग में दियार के अधिष्ठाता त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना ने ढोल नगाड़ों की थाप पर शाही स्नान किया। देवताओं ने आठ साल के बाद देव परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। हाड़ कंपा देने वाले ठंडे पानी में देवता के साथ भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी आस्था की डुबकी लगाई।
इससे पहले देवता ने रूद्रनाग पहुंचकर देव परंपरा भी निभाई। गौर रहे कि देवता त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना लाव-लश्कर के साथ 17 नवंबर को देवालय से रूद्रनाग के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद देवता कसोल, बरशैणी होते हुए रूद्रनाग पहुंचे। देवता त्रिजुगी नारायण का जगथम ऋषि के साथ ही भव्य देवमिलन हुआ। जगह-जगह पर देवता का भव्य स्वागत भी हुआ। श्रद्घालुओं ने देवता त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना के दर्शन भी किए। देव कारकूनों की मानें तो देवता ने रूद्रनाग में जाकर परंपरा निभाने का आदेश सुनाया था। इसके बाद देवविधि के साथ इस परंपरा को निभाया गया।
देवता कमेटी के प्रधान राजन शर्मा ने कहा कि देवता रूद्रनाग में आठ सालों के बाद परंपरा निभाई है। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्घालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि परंपरा निर्वहन के बाद देवता त्रिजुुगी नारायण और माता मंडासना अपने देवालय की ओर रवाना हो गए हैैं। देवालय पहुंचने पर देवता का हारियानों के द्वारा फूलमालाओं के साथ स्वागत किया जाएगा।
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इससे पहले देवता ने रूद्रनाग पहुंचकर देव परंपरा भी निभाई। गौर रहे कि देवता त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना लाव-लश्कर के साथ 17 नवंबर को देवालय से रूद्रनाग के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद देवता कसोल, बरशैणी होते हुए रूद्रनाग पहुंचे। देवता त्रिजुगी नारायण का जगथम ऋषि के साथ ही भव्य देवमिलन हुआ। जगह-जगह पर देवता का भव्य स्वागत भी हुआ। श्रद्घालुओं ने देवता त्रिजुगी नारायण और माता मंडासना के दर्शन भी किए। देव कारकूनों की मानें तो देवता ने रूद्रनाग में जाकर परंपरा निभाने का आदेश सुनाया था। इसके बाद देवविधि के साथ इस परंपरा को निभाया गया।
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देवता कमेटी के प्रधान राजन शर्मा ने कहा कि देवता रूद्रनाग में आठ सालों के बाद परंपरा निभाई है। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्घालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि परंपरा निर्वहन के बाद देवता त्रिजुुगी नारायण और माता मंडासना अपने देवालय की ओर रवाना हो गए हैैं। देवालय पहुंचने पर देवता का हारियानों के द्वारा फूलमालाओं के साथ स्वागत किया जाएगा।
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