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गूण टूटते ही भक्ति गीतों में बदले अश्लील जुमले

Sun, 10 Jan 2016 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू Updated Sun, 10 Jan 2016 11:31 PM IST
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traditional function at Kharahal

ठीक एक साल के बाद पूरी खराहल घाटी ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों से गूंज उठी। मौका था दियाली पर्व का। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मंगलमय धुन के बीच समस्त घाटी के लोग भी पराल और बगड़ा नामक घास से बनी गूण यानी रस्सी के सहारे झूम उठे। रविवार को घाटी के आराध्य देवता ज्वाणी महादेव और थान देवता के मंदिरों में परिक्रमा का पहला दौर पौ फटने से पहले शुरू हो गया।

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दूसरी परिक्रमा थरमाण गांव के चारों ओर की गई। इस दौरान लोगों ने देवलुओं का स्वागत धूप और अखरोट फेंक कर किया। तीसरी परिक्रमा ग्राहण गांव की हुई। इस अवसर पर लोगों ने अखरोट फेंक कर देवता का अभिवादन किया। यह परिक्रमा साल में एक बार होती है। मान्यता है कि परिक्रमा के दौरान देवता अपने हारियानों के लिए सुरक्षा रेखा खींचते हैं। शाम ढलते ही ज्वाणी महादेव के मंदिर स्थित न्योली में गूण तोड़ने की परिपाटी शुुरू हो गई। गूण देवता के कारकूनों ने देवविधि अनुसार ज्वाणी महादेव के भंडार के प्रांगण में सुबह पूजा-अर्चना के बाद बनाई गई। इसके लिए तमाम घर से पराल एकत्रित किया जाता है।
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परंपरानुसार अश्लील जुमलों से दोनों देवताओं के देवलु ज्वाणी महादेव के प्रांगण में खेल खेलते हैं। रविवार को गांव का कुछ ऐसा ही माहौल देखा गया। खेल खेलते समय हारियान एक-दूसरे पर अश्लील जुमले कसते हैं। उत्सव के दौरान ज्वाणी गांव से गूण को लाकर न्योली स्थित अंगु के पेड़ से लपेट दिया गया। उसके बाद देवविधि से दो देवताओं के देवलुओं के बीच गूण तोड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। गूण दो टुकड़ों से टूट गया, जो घाटी के लिए शुभ माना जाता है। वहीं, गूण टूटने के बाद दिन भर अश्लील गालियों से गूंज रही घाटी का माहौल तुरंत भक्तिमय हो उठा। देव परिक्रमा के दौरान महिलाओं ने थरमाण, ग्राहण, न्योली, ज्वाणी, जगरूबेहड़, लुहारबेढ़ आदि गांवों में देवता के लिए अखरोट फेंके गए। गूण का एक हिस्सा ज्वाणी और दूसरा थरमाण को दिया गया।
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ज्वाणी महादेव के कारदार ओमप्रकाश का कहना है कि यह प्रचलन सदियों पुराना है। दियाली उत्सव का आयोजन मर्यादा में रहकर किया जाए तो संस्कृति की खुशबू बरकरार रहती है। उनके अनुसार गूण के तीन या तीन से ज्यादा टुकड़े हों तो वह अशुभ माना जाता है।

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