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हर जिले में टांकरी लिखने का तरीका भिन्न : यतिन
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टांकरी को पढ़ने और लिखने का करवाया अभ्यास
संवाद न्यूज एजेेंसी
कुल्लू। जिला कुल्लू, मंडी, चंबा और कांगड़ा में टांकरी लिपि के अलग-अलग स्वरूप हैं। इन जिलों में टांकरी को लिखने का तरीका भी भिन्न है। ऐसे में टांकरी को सीखने, बोलने, लिखने और पढ़ने के लिए हमें इसके विभिन्न स्वरूपों की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। यह बात मंगलवार को प्रशिक्षक एवं साहित्यकार यतिन पंडित ने कही। देवसदन कुल्लू में टांकरी लिपि पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के युवा, लेखक, साहित्यकार और शिक्षक भाग ले रहे हैं।
मंगलवार को प्रशिक्षुओं को कुल्लू, मंडी, चंबा और कांगड़ा जिलों में टांकरी लिपि को कैसे लिखा और पढ़ा जाता है, के बारे में प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षुओं को टांकरी के स्वरूपों और वर्णमालाओं की जानकारी भी दी। दूसरे सत्र में प्रशिक्षुओं को टांकरी लिपि में शब्द संयोजन और उन्हें जोड़कर कैसे लिखें, का अभ्यास करवाया। संवाद
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संवाद न्यूज एजेेंसी
कुल्लू। जिला कुल्लू, मंडी, चंबा और कांगड़ा में टांकरी लिपि के अलग-अलग स्वरूप हैं। इन जिलों में टांकरी को लिखने का तरीका भी भिन्न है। ऐसे में टांकरी को सीखने, बोलने, लिखने और पढ़ने के लिए हमें इसके विभिन्न स्वरूपों की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। यह बात मंगलवार को प्रशिक्षक एवं साहित्यकार यतिन पंडित ने कही। देवसदन कुल्लू में टांकरी लिपि पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के युवा, लेखक, साहित्यकार और शिक्षक भाग ले रहे हैं।
मंगलवार को प्रशिक्षुओं को कुल्लू, मंडी, चंबा और कांगड़ा जिलों में टांकरी लिपि को कैसे लिखा और पढ़ा जाता है, के बारे में प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षुओं को टांकरी के स्वरूपों और वर्णमालाओं की जानकारी भी दी। दूसरे सत्र में प्रशिक्षुओं को टांकरी लिपि में शब्द संयोजन और उन्हें जोड़कर कैसे लिखें, का अभ्यास करवाया। संवाद
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