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Kullu News: मधुमक्खियों संग युवाओं ने भरी सफलता की उड़ान
Wed, 09 Apr 2025 05:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 09 Apr 2025 05:30 AM IST
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कराड़सू में बी फार्म का निरीक्षण करती जर्मनी की टीम। -संवाद
कुल्लू। कभी रोजगार की तलाश में भटकने वाले कुल्लू के युवाओं ने अब मधुमक्खी पालन में अपनी पहचान और भविष्य तलाश लिया है। जर्मनी द्वारा वित्तपोषित एक विशेष परियोजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जिले के 80 युवा आज मधुमक्खी पालन के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पर हैं।
इससे न केवल युवा खुद अच्छी आमदनी कर रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। घाटी की आबोहवा और फूलों की भरमार ने शहद उत्पादन को एक लाभकारी कार्य बना दिया है। कराड़सू स्थित ‘बी फार्म’ (मधुमक्खी पालन केंद्र) इस परिवर्तन का केंद्र बन चुका है, जहां से प्रशिक्षित होकर युवा अपने गांवों में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।
हाल ही में जर्मनी से आई विशेषज्ञों की टीम ने बी फार्म का दौरा किया और यहां चल रहे कार्यों की सराहना की। टीम ने शहद की गुणवत्ता का निरीक्षण किया और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बेहतर बताया। बी फार्म के मास्टर ट्रेनर दीनदयाल, जो कराड़सू गांव से ताल्लुक रखते हैं, युवाओं को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठा चुके हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं में अब प्राकृतिक खेती और मधुमक्खी पालन को लेकर गहरी रुचि जाग चुकी है।
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उन्होंने कहा कि सेब की फ्लावरिंग के इन दिनों में मधुमक्खी के बॉक्सों की डिमांड बहुत बढ़ गई है। कई युवा तो ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे है। इस पहल ने कुल्लू घाटी में स्वरोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। युवाओं के चेहरों पर आत्मविश्वास की चमक और शहद में उनकी मेहनत की मिठास साफ झलकती है। यह सिर्फ शहद उत्पादन नहीं, एक नई सोच और स्थायी विकास की उड़ान है।
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इससे न केवल युवा खुद अच्छी आमदनी कर रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। घाटी की आबोहवा और फूलों की भरमार ने शहद उत्पादन को एक लाभकारी कार्य बना दिया है। कराड़सू स्थित ‘बी फार्म’ (मधुमक्खी पालन केंद्र) इस परिवर्तन का केंद्र बन चुका है, जहां से प्रशिक्षित होकर युवा अपने गांवों में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।
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हाल ही में जर्मनी से आई विशेषज्ञों की टीम ने बी फार्म का दौरा किया और यहां चल रहे कार्यों की सराहना की। टीम ने शहद की गुणवत्ता का निरीक्षण किया और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बेहतर बताया। बी फार्म के मास्टर ट्रेनर दीनदयाल, जो कराड़सू गांव से ताल्लुक रखते हैं, युवाओं को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठा चुके हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं में अब प्राकृतिक खेती और मधुमक्खी पालन को लेकर गहरी रुचि जाग चुकी है।
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उन्होंने कहा कि सेब की फ्लावरिंग के इन दिनों में मधुमक्खी के बॉक्सों की डिमांड बहुत बढ़ गई है। कई युवा तो ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे है। इस पहल ने कुल्लू घाटी में स्वरोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। युवाओं के चेहरों पर आत्मविश्वास की चमक और शहद में उनकी मेहनत की मिठास साफ झलकती है। यह सिर्फ शहद उत्पादन नहीं, एक नई सोच और स्थायी विकास की उड़ान है।