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दो सप्ताह देरी से माता बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाट बंद
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कुल्लू। धार्मिक पर्यटन स्थल के लिए प्रसिद्ध माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर में मंदिर का कपाट बंद हो गया है। अब सैलानी और श्रद्धालुओं के लिए कपाट पांच माह बाद अप्रैल माह में खोला जाएगा। मौसम साफ रहने से इस बार कपाट 15 नवंबर के बजाए एक दिसंबर को बंद किया है। सरयोलसर में माता के वास में तापमान माइनस में पहुंचने से अब यहां पूजा पाठ नहीं होगी। ऐसे में अब श्रद्धालु माता के दर्शन नहीं कर पाएंगे।
समुद्रतल से करीब 10500 फीट ऊंचे सरयोलसर में जाड़े के मौसम में भारी बर्फबारी होती है। इस कारण यहां का संपर्क लोगों व पर्यटकों से कट जाता है। गर्मियों के दिनों में यहां सालाना हजारों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु पहुंचते हैं। अब सर्दी के मौसम के बाद गर्मी में ही पर्यटक माता के दर्शनों के साथ एक किलोमीटर की परिधि की सरयोलसर झील के दर्शन कर पाएंगे। खरसू के जंगल के बीचोंबीच धार्मिक स्थल में शीतलहर के साथ कड़ाके की ठंड पड़ गई है। ऐसे में यहां मंदिर के पुजारी का रुकना भी संभव नहीं है। माता बूढ़ी नागिन के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि मौसम ने भी करवट ली है। ऐसे में एक दिसंबर से माता के कपाट को बैसाख महीने तक के लिए बंद कर दिया गया है।
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समुद्रतल से करीब 10500 फीट ऊंचे सरयोलसर में जाड़े के मौसम में भारी बर्फबारी होती है। इस कारण यहां का संपर्क लोगों व पर्यटकों से कट जाता है। गर्मियों के दिनों में यहां सालाना हजारों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु पहुंचते हैं। अब सर्दी के मौसम के बाद गर्मी में ही पर्यटक माता के दर्शनों के साथ एक किलोमीटर की परिधि की सरयोलसर झील के दर्शन कर पाएंगे। खरसू के जंगल के बीचोंबीच धार्मिक स्थल में शीतलहर के साथ कड़ाके की ठंड पड़ गई है। ऐसे में यहां मंदिर के पुजारी का रुकना भी संभव नहीं है। माता बूढ़ी नागिन के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि मौसम ने भी करवट ली है। ऐसे में एक दिसंबर से माता के कपाट को बैसाख महीने तक के लिए बंद कर दिया गया है।
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