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जलती कोठी को देखकर हारियानों के निकले आंसू

Tue, 31 May 2022 09:36 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 09:36 PM IST
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Seeing the burning kothi, the tears of the Haryans came out
कुल्लू जिला के गड़सा घाटी में स्थित शियाह गांव में देवता का भंडार गृह (कोठी) में आग लगने के कारण जल ? - फोटो : Kullu
फरेंद्र ठाकुर
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कुल्लू। चार साल पहले ही हारियानों ने गड़सा घाटी के शियाह गांव के अधिष्ठाता जमदग्नि ऋषि के भंडार गृह (कोठी) का दोबारा निर्माण किया था। इस काष्ठकुणी शैली की कोठी को बनाने में लगभग 80 लाख रुपये की राशि खर्च हुई है। अंधरे में अपनी आंखों के सामने कोठी को जलता देखकर हारियान व ग्रामीण भी मजबूर दिखाई दिए, जबकि कुछ लोगों की आंखों से आंसू भी छलक गए।
देवता की कोठी में इस्तेमाल लकड़ी में शिव, विष्णु, ब्रह्मा समेत नौ दुर्गा के चित्रों को उकेरा गया था। इस बनाने में 30 कारीगरों ने छह महीने का समय लगाया था। इस कोठी को कड़ी मेहनत और लग्न के साथ बनाया, लेकिन अग्निकांड ने कारीगरों समेत हारियानों और गांववासियों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कुछ ही घंटे में देवता की साढ़े तीन मंजिला कोठी का ऊपरी भाग पूरी तरह जल गया। देखते ही देखते कोठी के भीतर विराजमान जमदग्नि ऋषि के दो मोहरे, 18 नरसिंगे व करनाली समेत अन्य साज-सज्जो के लिए रखा सोना-चांदी का सामान भी राख के ढेर में तब्दील हो गए।
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स्थानीय निवासी हेमराज ने बताया कि अग्निकांड की घटना से हारियानों और लोगों को ठेस पहुंची है। उन्होंने बताया कि 2018 में ही देवता की कोठी को दोबारा बनाया गया, जबकि इससे पहले देवता की वर्षों पुरानी कोठी थी। हारियानों व गांववासियों समेत अन्य दानी-सज्जनों की मदद से कोठी का दोबारा निर्माण किया गया था। संवाद
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पिछले सात सालों में जले कई मंदिर, करोड़ों का नुकसान
देव संस्कृति के लिए देश-विदेश में मशहूर कुल्लू जिले में देवी-देवताओं के मंदिर और देवालय पिछले सात सालों से राख के ढेर में तबदील हो रहे हैं। मानव जाति के साथ देवी-देवताओं पर भी विपदा का पहाड़ टूटने लगा है। अग्निकांड के पीछे चाहे जो भी कारण रहे हों, लेकिन इन घटनाओं को देव प्रकोप होने से जोड़ कर भी देखा जाने लगा है। कहीं देवता लोगों से रूठ तो नहीं रहे हैं। 2015 में बंजार के कोटला में देवता बड़ा छमांहू की कोठी आग के कारण राख हो गई थी, जबकि 2017 में भुंतर घाटी के वनशीरा देवता का मंदिर जला था। इसी साल महाराजा वैली के पीज गांव के देवता वीर अजयपाल का मंदिर जला था। इसमें दो अष्टधातु की मूर्ति व चांदी के तीन मोहरे समेत अन्य सामान जलकर राख हुआ था। इसके अलावा 2021 में सैंज की गाड़ापारली पंचायत में देवता राई नाग के दो मंदिर जल गए थे। सभी घटनाओं में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
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