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Kullu News: विधवा घुंघरी देवी को राहत देने के लिए आड़े आए नियम
Fri, 14 Nov 2025 05:22 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 14 Nov 2025 05:22 AM IST
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महिला...
राहत को तरस रही 85 वर्षीय आग की घटना प्रभावित महिला
दो घर जले, नियम के तहत मुआवजा एक का ही मिलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। झनियार गांव में विधवा महिला को फौरी राहत और मुआवजा देने में नियम आड़े आ गए हैं। इस कारण बुजुर्ग महिला घुंघरी देवी को न तो फौरी राहत मिल पाई है और न ही मुआवजा । हालांकि उनका नाम सूची में शामिल किया गया है।
दरअसल, महिला पहले अपने पति के साथ रहती थी और बेटा अपने परिवार के साथ अलग रहने लगा। महिला के पति की मौत के बाद भी महिला अलग घर में रह रही थी लेकिन आग में दोनों घर जलकर राख हो गए हैं। राशन कार्ड में महिला का नाम बेटे के साथ ही दर्ज है । इस कारण बेटे को ही फौरी राहत मिली है और साथ में मुआवजा के लिए भी बेटे का ही नाम सूची में डाला गया है।
अब महिला का कहना है कि उनके लिए न तो फौरी राहत मिल पाई है और न ही मुआवजा मिलेगा, जबकि उसका सबकुछ जलकर राख हो गया है। उम्र के इस पड़ाव में कहां और किससे मदद मांगूं यह समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रशासन की ओर से कुछ तो मदद की जाए, ताकि वह खाने पीने और बर्तन खरीद सके। उन्होंने कहा कि रसोई के सामान के साथ सोने के गहने जो बुढ़ापे के सहारे के लिए रखे थे वे भी नहीं बचे हैं।
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उधर, तहसीलदार बंजार नीरज शर्मा का कहना है कि नियम के हिसाब से माता की सेवा बेटे को ही करनी होती है और उनका परिवार भी एक साथ दर्ज है। ऐसे में नियमानुसार उनकी मदद नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद भी अगर जरूरतमंद हैं तो उनकी मदद करने का प्रयास किया जाएगा।
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राहत को तरस रही 85 वर्षीय आग की घटना प्रभावित महिला
दो घर जले, नियम के तहत मुआवजा एक का ही मिलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। झनियार गांव में विधवा महिला को फौरी राहत और मुआवजा देने में नियम आड़े आ गए हैं। इस कारण बुजुर्ग महिला घुंघरी देवी को न तो फौरी राहत मिल पाई है और न ही मुआवजा । हालांकि उनका नाम सूची में शामिल किया गया है।
दरअसल, महिला पहले अपने पति के साथ रहती थी और बेटा अपने परिवार के साथ अलग रहने लगा। महिला के पति की मौत के बाद भी महिला अलग घर में रह रही थी लेकिन आग में दोनों घर जलकर राख हो गए हैं। राशन कार्ड में महिला का नाम बेटे के साथ ही दर्ज है । इस कारण बेटे को ही फौरी राहत मिली है और साथ में मुआवजा के लिए भी बेटे का ही नाम सूची में डाला गया है।
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अब महिला का कहना है कि उनके लिए न तो फौरी राहत मिल पाई है और न ही मुआवजा मिलेगा, जबकि उसका सबकुछ जलकर राख हो गया है। उम्र के इस पड़ाव में कहां और किससे मदद मांगूं यह समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रशासन की ओर से कुछ तो मदद की जाए, ताकि वह खाने पीने और बर्तन खरीद सके। उन्होंने कहा कि रसोई के सामान के साथ सोने के गहने जो बुढ़ापे के सहारे के लिए रखे थे वे भी नहीं बचे हैं।
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उधर, तहसीलदार बंजार नीरज शर्मा का कहना है कि नियम के हिसाब से माता की सेवा बेटे को ही करनी होती है और उनका परिवार भी एक साथ दर्ज है। ऐसे में नियमानुसार उनकी मदद नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद भी अगर जरूरतमंद हैं तो उनकी मदद करने का प्रयास किया जाएगा।