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सेब पौधों में तौलिए के लिए यह सही समय
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
Updated Fri, 04 Dec 2015 05:43 PM IST
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जिले में कृषि-बागवानी के कार्य ने गति पकड़ ली है। बगीचों में तौलिये बनाने के साथ-साथ प्रूनिंग का कार्य भी शुरू हो गया है। वहीं, बागवानी वैज्ञानिकों ने भी बागवानों को बागवानी से संबंधित कार्यों के टिप्स दिए हैं।
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बागवानी अनुसंधान केंद्र सेऊबाग कुल्लू के प्रभारी वैज्ञानिक डीआर खजूरिया ने कहा कि सुपर कंप्यूटर मौसम विभाग शिमला से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगले पांच दिन में मौसम साफ रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी फलदार पौधों के तनों में सफेदी करें और पचास लीटर पानी में 15 किग्रा चूना और पांच किग्रा नीला थोथा अच्छी तरह घोलकर दो लीटर अलसी का तेल मिलाकर स्प्रे करने को कहा है। इसके अलावा बागवानों को फलदार पौधों के तौलिये बनाने का काम शुरू करने के साथ ही खाद और अन्य उर्वरक अनुमोदित मात्रा में डालने की सलाह दी है।
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सेब पौधों में गोबर की खाद सौ किलो, दो सिगल सुपर फॉस्फेट और एक किलो दो सौ ग्राम पोटाश मिलाने को कहा है। गुठलीदार फल पौधों में पचास किलो गोबर की 1.5 किलो सिगल सुपर फॉस्फेट और 1 किलो 200 ग्राम पोटाश मिलाने को कहा है। इसके अलावा अनार के पौधों में गोबर की खाद 20 किलो, 1.5 किलो सुपर फॉस्फेट और 1 किलो पोटाश मिलाने की सलाह दी है।
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