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Kullu News: भोटी भाषा में लिखे धर्म ग्रंथ पढ़ना सीख रहे लाहौल घाटी के बाशिंदे
Mon, 10 Feb 2025 10:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 10 Feb 2025 10:13 PM IST
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पाटा ट्रांस हिमालयन एंपावरमेंट सोसायटी दे रही प्रशिक्षण, 150 लोग किए पारंगत
भोटी कक्षा में 6 से 30 साल तक के लोग ले सकते हैं भाग : ज्ञालिक
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। बौद्ध धर्म के अनुयायी अपने धर्म ग्रंथों को पढ़ नहीं पाते हैं। लाहौल घाटी में बौद्ध धर्म को मानने वाले अधिकांश लोग भोटी भाषा न लिख पाते हैं और न ही पढ़ पाते हैं।
एक गैर सरकारी संस्था पाटा ट्रांस हिमालयन एंपावरमेंट सोसायटी लाहौल घाटी में लोगों को भोटी भाषा में लिखने और पढ़ने का प्रशिक्षण दे रही है। संस्था अब तक करीब 150 लोगों को भोटी भाषा में लिखने और पढ़ने में पारंगत कर चुकी है। इनमें अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। बौद्ध धर्म के ग्रंथ भोटी भाषा में लिखे गए हैं। भोटी भाषा का ज्ञान नहीं होने से लोग धर्म ग्रंथों को पढ़ नहीं पाते हैं।
साल 2024 से लाहौल के तोद वेली से संस्था ने लोगों को भोटी भाषा अध्ययन और अध्यापन का काम शुरू किया है। अभी तक तोद घाटी के दारचा, क्वारिंग, गैमूर, जिस्पा और खंगसर के करीब 150 लोगों को भोटी भाषा का ज्ञान दिया गया है। ये लोग भोटी भाषा को पढ़ने के साथ लिखने में भी निपुण हो गए हैं। 2025 में इस अभियान के तहत क्षेत्र के तीन और गांवों को जोड़ा गया है। संस्था के महासचिव तंजिन ज्ञालिक ने बताया कि भोटी कक्षा में 6 से 30 साल तक कोई भी शख्स भाग ले सकता है। कहा कि संस्था की ओर से लोगों को भोटी किताब, कॉपी, स्टेशनरी, टी-स्नेक्स, हीटिंग सिस्टम के लिए लकड़ी का इंतजाम किया गया है। तंजिन ने बताया कि भोटी भाषा पढ़ाने और लिखने के इस मुहिम को आने वाले दिनों में पूरे लाहौल में शुरू किया जाएगा। बताया कि लामा अंज्ञाल, तंजिन नोरबू क्वारिंग, अंगमो जिस्पा, छेवांग यंगजोत खंगसर, लामा यंगजोर दारचा, सोनम अंगदुई कोलोंग और समदो के तंजिन होजर लोगों को भोटी भाषा का ज्ञान दे रहे हैं।
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भोटी कक्षा में 6 से 30 साल तक के लोग ले सकते हैं भाग : ज्ञालिक
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। बौद्ध धर्म के अनुयायी अपने धर्म ग्रंथों को पढ़ नहीं पाते हैं। लाहौल घाटी में बौद्ध धर्म को मानने वाले अधिकांश लोग भोटी भाषा न लिख पाते हैं और न ही पढ़ पाते हैं।
एक गैर सरकारी संस्था पाटा ट्रांस हिमालयन एंपावरमेंट सोसायटी लाहौल घाटी में लोगों को भोटी भाषा में लिखने और पढ़ने का प्रशिक्षण दे रही है। संस्था अब तक करीब 150 लोगों को भोटी भाषा में लिखने और पढ़ने में पारंगत कर चुकी है। इनमें अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। बौद्ध धर्म के ग्रंथ भोटी भाषा में लिखे गए हैं। भोटी भाषा का ज्ञान नहीं होने से लोग धर्म ग्रंथों को पढ़ नहीं पाते हैं।
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साल 2024 से लाहौल के तोद वेली से संस्था ने लोगों को भोटी भाषा अध्ययन और अध्यापन का काम शुरू किया है। अभी तक तोद घाटी के दारचा, क्वारिंग, गैमूर, जिस्पा और खंगसर के करीब 150 लोगों को भोटी भाषा का ज्ञान दिया गया है। ये लोग भोटी भाषा को पढ़ने के साथ लिखने में भी निपुण हो गए हैं। 2025 में इस अभियान के तहत क्षेत्र के तीन और गांवों को जोड़ा गया है। संस्था के महासचिव तंजिन ज्ञालिक ने बताया कि भोटी कक्षा में 6 से 30 साल तक कोई भी शख्स भाग ले सकता है। कहा कि संस्था की ओर से लोगों को भोटी किताब, कॉपी, स्टेशनरी, टी-स्नेक्स, हीटिंग सिस्टम के लिए लकड़ी का इंतजाम किया गया है। तंजिन ने बताया कि भोटी भाषा पढ़ाने और लिखने के इस मुहिम को आने वाले दिनों में पूरे लाहौल में शुरू किया जाएगा। बताया कि लामा अंज्ञाल, तंजिन नोरबू क्वारिंग, अंगमो जिस्पा, छेवांग यंगजोत खंगसर, लामा यंगजोर दारचा, सोनम अंगदुई कोलोंग और समदो के तंजिन होजर लोगों को भोटी भाषा का ज्ञान दे रहे हैं।
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