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Kullu News: यूजीसी नियमों के विरोध में निकाली रैली, किया प्रदर्शन
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कुल्लू में देवभूमि पार्टी किसान प्रकोष्ठ के पदाधिकारी और जनता यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन करत
कुल्लू। जिला मुख्यालय में यूजीसी के नए नियमों और ट्रेड यूनियन समझौते के विरोध में शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता देवभूमि पार्टी किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अमर ठाकुर ने की। पार्टी के कार्यकर्ता और लोग भूतनाथ पुल के पास एकत्रित हुए और उसके बाद उपायुक्त कार्यालय तक सरवरी, लोअर ढालपुर और ढालपुर चौक, एसपी कार्यालय होते हुए रैली निकाली।
यहां प्रदर्शन किया गया। इसमें यूजीसी के नए नियमों का विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार की ओर से किए गए ट्रेड यूनियन समझौते पर भी एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यूजीसी बिल लाकर केंद्र सरकार ने जातिवाद को बढ़ावा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके चलते उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि यूजीसी की ओर से लागू किए गए छात्र विरोधी एवं संविधान विरोधी कानून को तत्काल निरस्त किया जाए। उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया को पूर्णत: मेरिट आधारित, पारदर्शी एवं संविधान सम्मत बनाया जाए। सामान्य समाज सहित सभी वर्गाें के योग्य छात्रों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर अमर ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक और ट्रेड यूनियन समझौता किया है। इससे भी किसानों और बागवानों को नुकसान होगा। खासकर हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को इसका सीधा असर पड़ेगा। इसके चलते उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस समझौते को भी निरस्त किया जाए ताकि यहां के किसानों-बागवानों के हितों की रक्षा हो सके। इस दौरान उन्होंने समाज में बढ़ रहे चिट्टा के चलन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। कहा कि इससे निपटने के लिए भी उचित कदम उठाने की जरूरत है।
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यहां प्रदर्शन किया गया। इसमें यूजीसी के नए नियमों का विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार की ओर से किए गए ट्रेड यूनियन समझौते पर भी एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यूजीसी बिल लाकर केंद्र सरकार ने जातिवाद को बढ़ावा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके चलते उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि यूजीसी की ओर से लागू किए गए छात्र विरोधी एवं संविधान विरोधी कानून को तत्काल निरस्त किया जाए। उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया को पूर्णत: मेरिट आधारित, पारदर्शी एवं संविधान सम्मत बनाया जाए। सामान्य समाज सहित सभी वर्गाें के योग्य छात्रों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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इस मौके पर अमर ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक और ट्रेड यूनियन समझौता किया है। इससे भी किसानों और बागवानों को नुकसान होगा। खासकर हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को इसका सीधा असर पड़ेगा। इसके चलते उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस समझौते को भी निरस्त किया जाए ताकि यहां के किसानों-बागवानों के हितों की रक्षा हो सके। इस दौरान उन्होंने समाज में बढ़ रहे चिट्टा के चलन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। कहा कि इससे निपटने के लिए भी उचित कदम उठाने की जरूरत है।
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