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Kullu News: बारिश ने पौधे लगाने के लिए बढ़ाया इंतजार
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कुल्लू। सूखे जैसे हालात के चलते जिले में बागवानी कार्य प्रभावित हुए हैं। सेब, प्लम, जापानी फल सहित अन्य फलदार पौधों की नई पौध लगाने के लिए बागवानों का इंतजार बढ़ गया है। जनवरी का पखवाड़ा बीतने वाला है लेकिन बर्फबारी और बारिश नहीं हुई है।
इससे बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। नए बगीचे तैयार करने के लिए बागवान नर्सरियों से पौधे नहीं खरीद रहे हैं। नर्सरियों में फलदार पौधों का स्टॉक डंप हो गया है। मुश्किल से 20 से 30 फीसदी पौधे ही अभी तक बिके हैं। मध्य जनवरी तक नर्सरियों में 60 से 70 फीसदी स्टॉक समाप्त हो जाता था। इस बार हालात बागवानी के विपरीत बने हुए हैं।
सूखे जैसे हालातों से बागवान सेब आदि की नई पौध नहीं खरीद पा रहे हैं वहीं अन्य कार्य भी ठप हो गए हैं। खराहल घाटी में बंदल गांव के बागवान जगदीश कुमार, रमेश और लगघाटी के बागवान प्रेम ठाकुर ने कहा कि सेब फसल के लिए समय पर बर्फबारी जरूरी होती है। समय पर बारिश-बर्फबारी न होने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बीमारी की चपेट में पौधों के आने से आगामी फसल पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि निचले क्षेत्रों में सेब के उत्पादन पर पहले ही असर पड़ा है। अगर मौसम की बेरुखी जनवरी में भी इसी तरह से रही तो इस साल बागवानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बागवान प्रूनिंग के कार्य को निपटाने में लगे हैं। प्रूनिंग का कार्य तेजी से चला हुआ है।
..............
सूखे जैसे हालातों से सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स प्रभावित हो सकते हैं। बंपर फसल के लिए बर्फबारी और बारिश का होना बेहद जरूरी है।
-बीएम चौहान, उपनिदेशक, बागवानी विभाग
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इससे बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। नए बगीचे तैयार करने के लिए बागवान नर्सरियों से पौधे नहीं खरीद रहे हैं। नर्सरियों में फलदार पौधों का स्टॉक डंप हो गया है। मुश्किल से 20 से 30 फीसदी पौधे ही अभी तक बिके हैं। मध्य जनवरी तक नर्सरियों में 60 से 70 फीसदी स्टॉक समाप्त हो जाता था। इस बार हालात बागवानी के विपरीत बने हुए हैं।
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सूखे जैसे हालातों से बागवान सेब आदि की नई पौध नहीं खरीद पा रहे हैं वहीं अन्य कार्य भी ठप हो गए हैं। खराहल घाटी में बंदल गांव के बागवान जगदीश कुमार, रमेश और लगघाटी के बागवान प्रेम ठाकुर ने कहा कि सेब फसल के लिए समय पर बर्फबारी जरूरी होती है। समय पर बारिश-बर्फबारी न होने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बीमारी की चपेट में पौधों के आने से आगामी फसल पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि निचले क्षेत्रों में सेब के उत्पादन पर पहले ही असर पड़ा है। अगर मौसम की बेरुखी जनवरी में भी इसी तरह से रही तो इस साल बागवानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बागवान प्रूनिंग के कार्य को निपटाने में लगे हैं। प्रूनिंग का कार्य तेजी से चला हुआ है।
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सूखे जैसे हालातों से सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स प्रभावित हो सकते हैं। बंपर फसल के लिए बर्फबारी और बारिश का होना बेहद जरूरी है।
-बीएम चौहान, उपनिदेशक, बागवानी विभाग