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पोरी मेले के समापन के बाद मणिमहेश रवाना हुआ जत्था
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त्रिलोकनाथ से मणिमहेश झील की रवाना होने से पहले खेल खेलते गूर।
- फोटो : Kullu
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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल के त्रिलोकनाथ में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक पोरी मेला के का रविवार को समापन हो गया। वहीं, त्रिलोकनाथ मंदिर से चंबा जिले के मणिमहेश डल झील के लिए श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था रवाना हो गया है।
आस्था के इस जत्थे को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। जत्था हर वर्ष त्रिलोकनाथ के पोरी मेले के समापन पर रवाना होता है। इस दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा भी मौजूद रहे।
जत्थों के रवाना होने से पहले गुरों को देव खेल आई और भविष्य वाणी की। मणिमहेश रवाना हुए जत्थे को जोबरंग और कुगती जोत होते हुए मणिमहेश झील तक पहुंचने में पांच दिन का समय लगेगा। मीलों की पैदल यात्रा करने के बाद श्रद्धालु मणिमहेश झील पहुंचेंगे। अपनी मनोकामनाओं को लेकर महिलाएं भी इस पवित्र यात्रा में शामिल हैं। मेले में सिर्फ धार्मिक रस्मों की अदायगी की गई। मेले के पहले दिन शनिवार को त्रिलोकीनाथ मंदिर कमेटी के कारकूनों और पुजारी की ओर से त्रिलोकनाथ मंदिर में पूजा पाठ के बाद मेला ग्राउंड तक धार्मिक रस्मों को निभाया गया था। त्रिलोकनाथ की माया दासी और राम नंदी ने बताया कि क्षेत्र के लोगों में पोरी मेले का बुहत इंतजार रहता था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे बड़े स्तर पर नहीं मनाया गया। मेले में दो साल से कबड्डी, वॉलीबाल के साथ साथ सांस्कृतिक संध्याएं भी नहीं हो पाई हैं।
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आस्था के इस जत्थे को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। जत्था हर वर्ष त्रिलोकनाथ के पोरी मेले के समापन पर रवाना होता है। इस दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा भी मौजूद रहे।
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जत्थों के रवाना होने से पहले गुरों को देव खेल आई और भविष्य वाणी की। मणिमहेश रवाना हुए जत्थे को जोबरंग और कुगती जोत होते हुए मणिमहेश झील तक पहुंचने में पांच दिन का समय लगेगा। मीलों की पैदल यात्रा करने के बाद श्रद्धालु मणिमहेश झील पहुंचेंगे। अपनी मनोकामनाओं को लेकर महिलाएं भी इस पवित्र यात्रा में शामिल हैं। मेले में सिर्फ धार्मिक रस्मों की अदायगी की गई। मेले के पहले दिन शनिवार को त्रिलोकीनाथ मंदिर कमेटी के कारकूनों और पुजारी की ओर से त्रिलोकनाथ मंदिर में पूजा पाठ के बाद मेला ग्राउंड तक धार्मिक रस्मों को निभाया गया था। त्रिलोकनाथ की माया दासी और राम नंदी ने बताया कि क्षेत्र के लोगों में पोरी मेले का बुहत इंतजार रहता था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे बड़े स्तर पर नहीं मनाया गया। मेले में दो साल से कबड्डी, वॉलीबाल के साथ साथ सांस्कृतिक संध्याएं भी नहीं हो पाई हैं।
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