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Kullu News: रथयात्रा देखने चार घंटे पहले ही जुटने लगे थे लोग

Thu, 02 Oct 2025 11:19 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 02 Oct 2025 11:19 PM IST
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People started gathering four hours before the Rath Yatra to witness it.
कुल्लू में सात दिवसीय दशहरा उत्सव में निकली भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा में भाग लेते देवता और दे
सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने 12 बजे ही सील कर दिया था रथ मैदान
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आपदा के जख्मों को भूल जिले की हर घाटी के लोगों की रही भागीदारी

रोशन ठाकुर
कुल्लू। ढाई महीने तक जिलावासियों ने आपदा के गहरे जख्मों को सहा है। जिले का कोई भी ऐसा कोना नहीं है, जहां नुकसान न हुआ हो। आपदा के 24 दिन बाद भी जिले का जनजीवन पटरी में नहीं लौटा है।
ऐसे में देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा को देखने के लिए हर घाटी के लोगों ने भाग लिया। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा शाम 4:50 बजे शुरू हुई लेकिन रथयात्रा और अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ को देखने के लिए लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। इसके लिए लोगों ने सुबह 12:00 से पहले रथ मैदान में डेरा डालना शुरू कर दिया था। पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से रथ मैदान को दोपहर 12:00 बजे से पहले ही सील कर दिया था। लोगों ने तेज धूप के बीच रथयात्रा के लिए चार घंटे का इंतजार किया। हालांकि शुरू में लोगों की भीड़ सैकड़ों में थी। जैसे ही भगवान रघुनाथ का प्रवेश रथ मैदान में हुआ देखते ही देखते पूरा मैदान और सड़कें लोगों की भारी भीड़ से भर गईं। बाह्य सराज आनी-निरमंड से लेकर कुल्लू-मनाली, बंजार, सैंज, मणिकर्ण, खराहल, लगवैली के हजारों लोगों ने आपदा को पीछे छोड़कर सूबे के सबसे बड़े कुल्लू दशहरा के गवाह बने।
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जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर, भागे राम राणा, नरोत्तम ठाकुर और लाल चंद ठाकुर ने कहा कि आपदा ने लोगों ने ताउम्र न भूलने वाले जख्म दिए हैं। बावजूद इसके जिलावासियों में देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था है। किसी भी दुख-दर्द व मुसीबत में वह सबसे पहले देवताओं की शरण में ही पहुंचते हैं। चाहे वह आपदा का वक्त ही क्यों न हो, इस दौरान भी लोग देवता की शरण में गए थे।
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