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Kullu News: औने-पौने दामों में बिक रहा मटर, किसान मायूस
Thu, 28 May 2026 07:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 28 May 2026 07:04 AM IST
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भुंतर सब्जी मंडी में हरा मटर की पैकिंग करने में जुटे कामगार।-संवाद
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के किसानों को इस बार मटर की फसल के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे किसान मायूस हैं। इन दिनों घाटी के किसान अपनी मटर की फसल लेकर सब्जी मंडियों में पहुंच रहे हैं लेकिन वहां उन्हें केवल 30 से 35 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिल रही है। किसानों का कहना है कि इतने कम दाम में उनकी मेहनत और लागत तक नहीं निकल पा रही।
किसानों के अनुसार एक सप्ताह पहले तक मटर के दाम 50 रुपये प्रति किलो से अधिक मिल रहे थे लेकिन अब अचानक कीमतों में भारी गिरावट आ गई है। पिछले वर्ष किसानों को मटर के 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक दाम मिले थे, जबकि इस बार बाजार भाव काफी नीचे पहुंच गए हैं।
घाटी के किसान ठाकुर दत्त, लक्ष्मण सिंह, माघु राम, ध्यान सिंह, किशन चंद और जगत राम ने बताया कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। खाद, दवाइयों और अन्य कृषि सामग्री के साथ-साथ मटर का बीज भी 200 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर खरीदा गया था लेकिन अब तैयार फसल कौड़ियों के भाव बिक रही है।
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किसानों का कहना है कि उन्होंने मटर की खेती बेहतर आय और परिवार के खर्च पूरे करने की उम्मीद से की थी लेकिन मौजूदा दामों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उनका कहना है कि खेतों में दिन-रात की गई मेहनत का भी उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।
वहीं, किसानों और कारोबारियों का मानना है कि बाजार में स्थानीय मटर की अधिक आवक होने के कारण दामों में गिरावट आई है।
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किसानों के अनुसार एक सप्ताह पहले तक मटर के दाम 50 रुपये प्रति किलो से अधिक मिल रहे थे लेकिन अब अचानक कीमतों में भारी गिरावट आ गई है। पिछले वर्ष किसानों को मटर के 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक दाम मिले थे, जबकि इस बार बाजार भाव काफी नीचे पहुंच गए हैं।
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घाटी के किसान ठाकुर दत्त, लक्ष्मण सिंह, माघु राम, ध्यान सिंह, किशन चंद और जगत राम ने बताया कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। खाद, दवाइयों और अन्य कृषि सामग्री के साथ-साथ मटर का बीज भी 200 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर खरीदा गया था लेकिन अब तैयार फसल कौड़ियों के भाव बिक रही है।
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किसानों का कहना है कि उन्होंने मटर की खेती बेहतर आय और परिवार के खर्च पूरे करने की उम्मीद से की थी लेकिन मौजूदा दामों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उनका कहना है कि खेतों में दिन-रात की गई मेहनत का भी उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।
वहीं, किसानों और कारोबारियों का मानना है कि बाजार में स्थानीय मटर की अधिक आवक होने के कारण दामों में गिरावट आई है।