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बिना इलाज घर लौट गए मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:06 PM IST
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की सामूहिक हड़ताल का खामियाजा यहां पहुंचे सैकड़ों मरीजों को भुगतना पड़ा। यहां तक कि मरीजों को सारा दिन डॉक्टरों का इंतजार कर बिना इलाज करवाए ही घर लौटना पड़ा।
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सोमवार सुबह नौ बजे क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में काफी संख्या में मरीज पहुंचे थे। लेकिन, डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मरीज कभी इमरजेंसी का रुख करते रहे तो कभी अस्पताल परिसर में लगाए गए बेंचों पर लेटते रहे। दर्द से कराहते मरीजों को मालूम नहीं था कि आज डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। डॉक्टरों के सामूहिक हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने वाला कोई नहीं था। अस्पताल पहुंचे मरीजों के तीमारदार मोती लाल, स्नेहा, वंदना, तुली देवी और लोकेश ने सवाल उठाया है कि यदि डॉक्टरों ने सामूहिक हड़ताल पर जाना था तो पर्ची काटने वाले काउंटर पर दिनभर अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारी क्यों तैनात कर रखे थे? उनका कहना है कि डॉक्टरों ने सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया था तो पर्ची काउंटर खोलने की जरूरत ही क्या थी? उनका कहना है कि इस काउंटर के पास सुबह नौ से वे पर्ची बनवाने के लिए खड़े थे, लेकिन घंटो इंतजार करने बावजूद काउंटर पर तैनात कर्मचारियों ने डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर जाने की जानकारी दी। लिहाजा, मरीजों को बिना इलाज कर घर की ओर लौटना पड़ा।
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कुछ पैसे वाले वाले मरीजों ने तो निजी अस्पतालों का रुख कर लिया, लेकिन गरीब मरीजों को वापस घर लौटना पड़ा। अस्पताल की इमरजेंसी ओपीडी में दिनभर मरीजों की लाइनें लगी रहीं। दिनभर लाइन में खड़े रहने के बावजूद कई मरीजों की शाम तक बारी नहीं आई। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ही नहीं, बल्कि जिला के जरी, बंजार, भुंतर, सैंज, मनाली, नग्गर आदि अन्य सभी स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्रों में पहुंचने के बाद मरीजों को बिना उपचार के ही घर लौटना पड़ा।
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सीएमओ कुल्लू वाईडी शर्मा ने बताया कि सोमवार को जिला भर के सभी डॉक्टर मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर गए थे। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में इमरजेंसी में मरीजों का उपचार किया गया। प्रशासन ने इमरजेंसी में 24 घंटे डॉक्टर तैनात कर रखे थे।