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Kullu News: हे भगवान.... ऐसे दिन किसी को न देखने पड़ें
Fri, 03 Jan 2025 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 03 Jan 2025 10:26 PM IST
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प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने आ रहे लोग कर रहे दुआ, दर्द देख छलक रहीं आंखें
अग्निकांड के तीसरे दिन भी प्रभावित परिवारों की आंखों से नहीं थमा आंसुओं का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार/कुल्लू। भीषण अग्निकांड के बाद तांदी गांव में माहौल गमगीन है। तीसरे दिन भी प्रभावित परिवारों की आंखों से आंसू छलकते रहे। आसपास के गांवों के लोग और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
राख के ढेर में बदल चुके आशियानों को देखकर सबकी आंखें नम हो रही हैं। ढांढस बंधाने आए लोगों के मुंह से यही शब्द निकल रहे हैं कि हे भगवान... ऐसी आपदा किसी पर न आए और ऐसे दिन किसी को न देखने पड़ें।
उधर, अग्निकांड से प्रभावित 33 परिवारों को यही चिंता सता रही है कि मकान के साथ जिंदगी भर की पूंजी जलने के बाद उनका जीवन कैसे कटेगा। पूरे गांव का माहौल गमगीन है। राख के ढेर बन चुके आशियानों को देखकर प्रभावित कई परिवार देवता को पुकार रहे हैं तो कई पूर्वजों को याद कर आंसू बहा रहे हैं। सब कुछ राख होने के साथ अपने पूर्वजों की याद में घरों में रखीं निशानियां जलने का गम ग्रामीणों के चेहरे में साफ देखा जा सकता है।
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समझ नहीं आ रहा दोबारा कैसे आएंगे खुशी के पल
तांदी गांव में जल चुके 17 घर और छह गोशालाएं काष्ठकुणी शैली के बने थे। अग्निकांड में भव्य मकानों से आठ से दस कमरों के घर स्वाह हो गए, वहीं पारंपरिक औजार और साजोसामान भी राख हो गया। इन संसाधनों को पूर्वजों से लेकर ग्रामीण हर समय खेती-बाड़ी और अन्य कामों में उपयोग में लाते थे। बुजुर्ग डोलू देवी, कातकू राम, चेन राम और बेगू देवी ने कहा कि पुश्तैनी घरों के आग में जलने से उनके आंसू नहीं रुक रहे हैं। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। समझ नहीं आ रहा अब खुशी के पल दोबारा कैसे आएंगे।
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आग से पारंपरिक साधन भी राख, कुछ नहीं बचा
आग से तहस-नहस हुए सपनों के बीच गांव की प्रभावित महिलाओं को पशुधन की भी चिंता सता रही है। खुले आसमान के नीचे रखे पशुओं को देखकर कह रही हैं कि हमारी किस्मत ही खराब निकली। घास कटाई से दराटी, खेतीबाड़ी के लिए कुदाल, रस्सियां, दराट, किल्अे, कंबल, मंदरियां, शैले, पट्टू, कड़छी व कोठड़ी सहित जीवन यापन के सभी पारंपरिक साधन पलभर में राख हो गए। बुजुर्गों की ओर से हाथ से बनाई गईं वस्तुओं को ग्रामीणों संजोकर रखा था। गांववासी दलीप सिंह नेगी ने कहा कि गांव की प्राचीन विरासत नष्ट हो गई है। अब चारों तरफ राख के ढेर नजर आ रहे हैं।
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अग्निकांड के तीसरे दिन भी प्रभावित परिवारों की आंखों से नहीं थमा आंसुओं का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार/कुल्लू। भीषण अग्निकांड के बाद तांदी गांव में माहौल गमगीन है। तीसरे दिन भी प्रभावित परिवारों की आंखों से आंसू छलकते रहे। आसपास के गांवों के लोग और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
राख के ढेर में बदल चुके आशियानों को देखकर सबकी आंखें नम हो रही हैं। ढांढस बंधाने आए लोगों के मुंह से यही शब्द निकल रहे हैं कि हे भगवान... ऐसी आपदा किसी पर न आए और ऐसे दिन किसी को न देखने पड़ें।
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उधर, अग्निकांड से प्रभावित 33 परिवारों को यही चिंता सता रही है कि मकान के साथ जिंदगी भर की पूंजी जलने के बाद उनका जीवन कैसे कटेगा। पूरे गांव का माहौल गमगीन है। राख के ढेर बन चुके आशियानों को देखकर प्रभावित कई परिवार देवता को पुकार रहे हैं तो कई पूर्वजों को याद कर आंसू बहा रहे हैं। सब कुछ राख होने के साथ अपने पूर्वजों की याद में घरों में रखीं निशानियां जलने का गम ग्रामीणों के चेहरे में साफ देखा जा सकता है।
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समझ नहीं आ रहा दोबारा कैसे आएंगे खुशी के पल
तांदी गांव में जल चुके 17 घर और छह गोशालाएं काष्ठकुणी शैली के बने थे। अग्निकांड में भव्य मकानों से आठ से दस कमरों के घर स्वाह हो गए, वहीं पारंपरिक औजार और साजोसामान भी राख हो गया। इन संसाधनों को पूर्वजों से लेकर ग्रामीण हर समय खेती-बाड़ी और अन्य कामों में उपयोग में लाते थे। बुजुर्ग डोलू देवी, कातकू राम, चेन राम और बेगू देवी ने कहा कि पुश्तैनी घरों के आग में जलने से उनके आंसू नहीं रुक रहे हैं। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। समझ नहीं आ रहा अब खुशी के पल दोबारा कैसे आएंगे।
आग से पारंपरिक साधन भी राख, कुछ नहीं बचा
आग से तहस-नहस हुए सपनों के बीच गांव की प्रभावित महिलाओं को पशुधन की भी चिंता सता रही है। खुले आसमान के नीचे रखे पशुओं को देखकर कह रही हैं कि हमारी किस्मत ही खराब निकली। घास कटाई से दराटी, खेतीबाड़ी के लिए कुदाल, रस्सियां, दराट, किल्अे, कंबल, मंदरियां, शैले, पट्टू, कड़छी व कोठड़ी सहित जीवन यापन के सभी पारंपरिक साधन पलभर में राख हो गए। बुजुर्गों की ओर से हाथ से बनाई गईं वस्तुओं को ग्रामीणों संजोकर रखा था। गांववासी दलीप सिंह नेगी ने कहा कि गांव की प्राचीन विरासत नष्ट हो गई है। अब चारों तरफ राख के ढेर नजर आ रहे हैं।