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सेब के तुड़ान, ढुलाई के लिए पहुंचे नेपाली मजदूर
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कुल्लू। कोरोना की दूसरी लहर के बाद हालात सामान्य होते ही नेपाली मजदूरों ने अब कुल्लू घाटी में सेब, नाशपाती के तुड़ान व ढुलाई के लिए मोर्चा संभाल लिया है। दर्जनों नेपाली मजदूर इन दिनों कुल्लू पहुंच गए हैं।
नेपाली मजदूर सीजन के लिए 500 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। इसमें मजदूरों का दोपहर का खाना भी शामिल हैं। बड़े बागवान मजदूरों को सुबह व शाम का खाना खिलाने के साथ दिहाड़ी दे रहे हैं। कुल्लू, खराहल, मणिकर्ण घाटी, ऊझी घाटी, सैंज, बंजार में सड़क किनारे सेब सीजन के लिए लगाए गए अस्थायी टेंट और सेब के बगीचों में इन नेपाली मजदूरों की चहल-पहल देखी जा सकती है। सीजन में स्थानीय मजदूरों के मुकाबले तुड़ान, ढुलाई आदि में नेपाली मजदूर दोगुना काम करते हैं। सीजन के लिए मजदूर मिलने से बागवानों की चिंता कम हुई है। गौर रहे कि पिछले साल कोरोना के चलते नेपाली मजदूर सीजन के लिए नहीं आ सके थे। इसके बाद बागवानों ने स्वयं मोर्चा संभालते ही अपने बगीचों में सेब का तुड़ान खुद ही किया था। लेकिन इस बार फसल अधिक है। अभी तक सिर्फ बिहार व दिल्ली के प्रवासी मजदूर आए थे। लेकिन ये मजदूर सिर्फ सब्जी मंडियों में ही काम कर रहे थे। सेब के बगीचों में काम के लिए बागवानों को मजदूर नहीं मिल रहे थे। अब नेपाली मजदूर आने के बाद बागवान तुड़ान के बारी लगा रहे हैं। एक बागवान का काम पूरा होने के बाद इन नेपाली मजदूरों को दूसरे बागवान के पास काम दिया जा रहा है, जिससे उन्हें घाटा न उठाना पड़े।
नेपालियों पर ही रहता जिम्मा
फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन सदर कुल्लू के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि सीजन के लिए नेपाली मजदूर आने से बागवानों की मुश्किलें कम हुई हैं। सीजन में तुड़ान व ढुलाई का जिम्मा नेपालियों पर ही रहता है।
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नेपाली मजदूर सीजन के लिए 500 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। इसमें मजदूरों का दोपहर का खाना भी शामिल हैं। बड़े बागवान मजदूरों को सुबह व शाम का खाना खिलाने के साथ दिहाड़ी दे रहे हैं। कुल्लू, खराहल, मणिकर्ण घाटी, ऊझी घाटी, सैंज, बंजार में सड़क किनारे सेब सीजन के लिए लगाए गए अस्थायी टेंट और सेब के बगीचों में इन नेपाली मजदूरों की चहल-पहल देखी जा सकती है। सीजन में स्थानीय मजदूरों के मुकाबले तुड़ान, ढुलाई आदि में नेपाली मजदूर दोगुना काम करते हैं। सीजन के लिए मजदूर मिलने से बागवानों की चिंता कम हुई है। गौर रहे कि पिछले साल कोरोना के चलते नेपाली मजदूर सीजन के लिए नहीं आ सके थे। इसके बाद बागवानों ने स्वयं मोर्चा संभालते ही अपने बगीचों में सेब का तुड़ान खुद ही किया था। लेकिन इस बार फसल अधिक है। अभी तक सिर्फ बिहार व दिल्ली के प्रवासी मजदूर आए थे। लेकिन ये मजदूर सिर्फ सब्जी मंडियों में ही काम कर रहे थे। सेब के बगीचों में काम के लिए बागवानों को मजदूर नहीं मिल रहे थे। अब नेपाली मजदूर आने के बाद बागवान तुड़ान के बारी लगा रहे हैं। एक बागवान का काम पूरा होने के बाद इन नेपाली मजदूरों को दूसरे बागवान के पास काम दिया जा रहा है, जिससे उन्हें घाटा न उठाना पड़े।
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नेपालियों पर ही रहता जिम्मा
फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन सदर कुल्लू के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि सीजन के लिए नेपाली मजदूर आने से बागवानों की मुश्किलें कम हुई हैं। सीजन में तुड़ान व ढुलाई का जिम्मा नेपालियों पर ही रहता है।
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