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Kullu News: देव परंपरा निभाने दशहरा के लिए निकलीं मां हिडिंबा
Wed, 01 Oct 2025 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 01 Oct 2025 11:15 PM IST
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हिडिंबा माता हारियानों के साथ ढोल नगाड़ों की थाप पर दशहरा उत्सव के लिए प्रस्थान करती हुई। संवा
ढूंगरी स्थित मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा, जगह-जगह हुआ जोरदार स्वागत
देवी के दर्शन करने के लिए लगीं कतारें, हिडिंबा के पहुंचते ही शुरू होगा उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए माता हिडिंबा कुल्लू के लिए रवाना हो गई हैं। बुधवार सुबह ढूंगरी स्थित हिडिंबा मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकली।
मालरोड होते हुए निकली शोभायात्रा के दौरान दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह माता का स्वागत किया गया। प्रसाद और देवभोज का आयोजन किया गया।
अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव दो से आठ अक्तूबर तक मनाया जा रहा है। उत्सव की सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए ढुंगरी गांव स्थित हिडिंबा मंदिर से देवी की ऐतिहासिक रथयात्रा शुरू हुई। पूजा-अर्चना के पश्चात सैकड़ों हारियानों और कारकून रथयात्रा के साथ निकले। रथ में विराजमान देवी हिडिंबा और महर्षि मनु जहां से गुजरे, वहां दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइनें लग गईं। जगह-जगह प्रसाद भी वितरित किया। वीरवार को देवी के रघुनाथ मंदिर पहुंचते ही उत्सव का आगाज हो जाएगा।
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मान्यता है कि देवी हिडिंबा के बिना दशहरा उत्सव का आगाज नहीं होता। कुल्लू में दशहरा का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। देवी हिडिंबा का इसमें विशेष महत्व है। दशहरा देवी हिडिंबा के आगमन के बाद शुरू होता है। सात दिन तक चलने वाले उत्सव के दौरान देवी कुल्लू स्थित अस्थायी शिविर में रहेंगी।
पहले दिन देवी हिडिंबा का रथ कुल्लू के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ मंदिर और राजमहल पहुंचेगा। राज परिवार की ओर से अश्व पूजा होगी। सात दिन तक अस्थायी शिविर में रहने के बाद अंतिम दिन लंका दहन के पश्चात ही देवी वापस आएंगी। हिडिंबा माता के गूर देवी चंद ने बताया कि माता बुधवार रात को कुल्लू पहुंचेंगी। सुबह देवी का स्वागत होगा। रामशिला में देवी हिडिंबा को निमंत्रण देने के लिए छड़ी आएगी। यहां से भगवान रघुनाथ के मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगी। कारदार रघुवीर नेगी ने बताया कि माता हिडिंबा का जगह-जगह स्वागत हुआ।
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ऊझी घाटी के कई और देवता कुल्लू रवाना
देवी हिडिंबा के अलावा ऊझी घाटी से दर्जनों देवी-देवता दशहरा में भाग लेने के लिए बुधवार को रवाना हुए। गौशाल गांव से गौतम ऋषि और तक्षक नाग, नसोगी से शंख नारायण, चचोगा-अलेउ से सृष्टि नारायण, शिरघन नाग, फाहली नाग, माता संध्या गायत्री सहित कई देवी-देवता उत्सव में भाग लेंगे।
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देवी के दर्शन करने के लिए लगीं कतारें, हिडिंबा के पहुंचते ही शुरू होगा उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए माता हिडिंबा कुल्लू के लिए रवाना हो गई हैं। बुधवार सुबह ढूंगरी स्थित हिडिंबा मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकली।
मालरोड होते हुए निकली शोभायात्रा के दौरान दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह माता का स्वागत किया गया। प्रसाद और देवभोज का आयोजन किया गया।
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अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव दो से आठ अक्तूबर तक मनाया जा रहा है। उत्सव की सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए ढुंगरी गांव स्थित हिडिंबा मंदिर से देवी की ऐतिहासिक रथयात्रा शुरू हुई। पूजा-अर्चना के पश्चात सैकड़ों हारियानों और कारकून रथयात्रा के साथ निकले। रथ में विराजमान देवी हिडिंबा और महर्षि मनु जहां से गुजरे, वहां दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइनें लग गईं। जगह-जगह प्रसाद भी वितरित किया। वीरवार को देवी के रघुनाथ मंदिर पहुंचते ही उत्सव का आगाज हो जाएगा।
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मान्यता है कि देवी हिडिंबा के बिना दशहरा उत्सव का आगाज नहीं होता। कुल्लू में दशहरा का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। देवी हिडिंबा का इसमें विशेष महत्व है। दशहरा देवी हिडिंबा के आगमन के बाद शुरू होता है। सात दिन तक चलने वाले उत्सव के दौरान देवी कुल्लू स्थित अस्थायी शिविर में रहेंगी।
पहले दिन देवी हिडिंबा का रथ कुल्लू के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ मंदिर और राजमहल पहुंचेगा। राज परिवार की ओर से अश्व पूजा होगी। सात दिन तक अस्थायी शिविर में रहने के बाद अंतिम दिन लंका दहन के पश्चात ही देवी वापस आएंगी। हिडिंबा माता के गूर देवी चंद ने बताया कि माता बुधवार रात को कुल्लू पहुंचेंगी। सुबह देवी का स्वागत होगा। रामशिला में देवी हिडिंबा को निमंत्रण देने के लिए छड़ी आएगी। यहां से भगवान रघुनाथ के मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगी। कारदार रघुवीर नेगी ने बताया कि माता हिडिंबा का जगह-जगह स्वागत हुआ।
ऊझी घाटी के कई और देवता कुल्लू रवाना
देवी हिडिंबा के अलावा ऊझी घाटी से दर्जनों देवी-देवता दशहरा में भाग लेने के लिए बुधवार को रवाना हुए। गौशाल गांव से गौतम ऋषि और तक्षक नाग, नसोगी से शंख नारायण, चचोगा-अलेउ से सृष्टि नारायण, शिरघन नाग, फाहली नाग, माता संध्या गायत्री सहित कई देवी-देवता उत्सव में भाग लेंगे।