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पहले तुड़ान में ही आधे खाली हो गए कई बगीचे
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कुल्लू। इस बार सीजन में हो रही बारिश का बागवानी पर अनुकूल असर हुआ है। सेब के बगीचों में बारिश से इस बार बेहतर रंग आया है। कई बगीचों में बागवानों को सेब में रंग आने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।
जिले के निचले क्षेत्र के बागवानों को सेब के रंग को लेकर सबसे अधिक समस्या होती थी। लेकिन इस बार अच्छा रंग होने से पहले ही तुड़ान में कई बगीचे आधे खाली हो गए हैं। अगर मौसम का रुख ऐसे ही रहता है तो 20 अगस्त तक कई बगीचे 80 फीसदी तक खाली हो जाएंगे। सीजन के शुरूआती दौर में बागवानों को सेब के बेहतर दाम भी मिल रहे हैं। ऐसे में बागवान सेब मंडियों तक पहुंचाने में कोई देर नहीं कर रहे हैं। सब्जी मंडी पतलीकूहल, बंदरोल, भुंतर, शाट सहित दिल्ली की आजादपुर मंडी के लिए सेब की सैकड़ों पेटियां हर दिन जा रही हैं। बागवान गोपाल सिंह, नरेश कुमार, रविंद्र, विजय और पुने राम ने कहा कि अच्छी बरसात के चलते इस बार सेब में रंग बेहतर आया है। इससे शुरूआती दौर में सेब अधिक निकला है। बारिश से फल का आकार भी अच्छा बन रहा है। छोटे पेड़ों के फलों में अधिक रंग आ गया है। हालांकि उन्हें इस बार अधिक स्प्रे का इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ा। कोरोना के बीच सेब की इन दिनों भारी मांग हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर बागवानों को मिल रहा है। उधर, फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन कुल्लू के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि संगठन लगातार किसानों व बागवानों के संपर्क में है। उधर, इस संबंध में बागवानी विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने कहा कि सेब को तोड़ने में बागवान जल्दबाजी न करें। सेब में अच्छा रंग होने पर इसे बेचने के लिए मंडी में लाएं। इसके बागवानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
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जिले के निचले क्षेत्र के बागवानों को सेब के रंग को लेकर सबसे अधिक समस्या होती थी। लेकिन इस बार अच्छा रंग होने से पहले ही तुड़ान में कई बगीचे आधे खाली हो गए हैं। अगर मौसम का रुख ऐसे ही रहता है तो 20 अगस्त तक कई बगीचे 80 फीसदी तक खाली हो जाएंगे। सीजन के शुरूआती दौर में बागवानों को सेब के बेहतर दाम भी मिल रहे हैं। ऐसे में बागवान सेब मंडियों तक पहुंचाने में कोई देर नहीं कर रहे हैं। सब्जी मंडी पतलीकूहल, बंदरोल, भुंतर, शाट सहित दिल्ली की आजादपुर मंडी के लिए सेब की सैकड़ों पेटियां हर दिन जा रही हैं। बागवान गोपाल सिंह, नरेश कुमार, रविंद्र, विजय और पुने राम ने कहा कि अच्छी बरसात के चलते इस बार सेब में रंग बेहतर आया है। इससे शुरूआती दौर में सेब अधिक निकला है। बारिश से फल का आकार भी अच्छा बन रहा है। छोटे पेड़ों के फलों में अधिक रंग आ गया है। हालांकि उन्हें इस बार अधिक स्प्रे का इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ा। कोरोना के बीच सेब की इन दिनों भारी मांग हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर बागवानों को मिल रहा है। उधर, फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन कुल्लू के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि संगठन लगातार किसानों व बागवानों के संपर्क में है। उधर, इस संबंध में बागवानी विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने कहा कि सेब को तोड़ने में बागवान जल्दबाजी न करें। सेब में अच्छा रंग होने पर इसे बेचने के लिए मंडी में लाएं। इसके बागवानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
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