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बर्फ पर उकेरी मणिमहेश ट्रैक की प्राचीन दास्तां
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लाहौल-स्पीति के जोवरंग में बर्फबारी के स्नो फेस्टिवल में पहुंचे प्रधान सचिव जनजातीय विकास ओंकार
- फोटो : Kullu
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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति के बहुआयामी लोकोत्सव स्नो फेस्टिवल का पड़ाव वीरवार को जोवरंग गांव में रहा। इस मौके पर लोक संस्कृति से सराबोर गतिविधियों के बीच स्नो क्राफ्ट (बर्फ की आकृति) आकर्षण का केंद्र रही। गांव के लोगों ने छम (पुल) और मणिमहेश ट्रैक की प्राचीन दास्तां को बर्फ पर उकेर कर समझाने का प्रयास किया। बर्फ की कलाकृति के जरिये दर्शाया गया कि पुराने समय में यहां चिनाब नदी पर पुल नहीं था।
पुल नहीं होने पर वामतट पर बसे जोवरंग, रापे और राशेल गांव के लोग झाड़ी और पेड़ की टहनियों को बुनकर उसके सहारे नदी पार करते थे।
जोवरंग में आयोजित स्नो फेस्टिवल में स्थानीय महिला मंडलों की पारंपरिक परिधानों में झांकी निकाली। मंदिर प्रांगण से स्नो फेस्टिवल के आयोजन स्थल तक झांकी का आयोजन किया गया। स्थानीय युवक मंडन ने कोरोना पर नाटक व प्राचीनतम गीत घुरे, महिला मंडल जोवरंग, रापे, राशेल और फूड़ा की सदस्यों ने लाहौली गीतों पर लोकनृत्य पेश किया। राशेल गांव की महिमा ने बांसुरी बजाकर कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। रस्साकशी, तीरंदाजी, वंगताड़ और बुनाई प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ। स्नो फेस्टिवल में स्थानीय लोगों ने मुख्यातिथि एवं विशेष मेहमानों को यहां मनाए जाने वाले देवी-देवताओं को समर्पित प्राचीनतम योर उत्सव की जानकारी दी। वासुकी नाग टूरिज्म क्लब ने मुख्यातिथि जनजातीय विकास के प्रधान सचिव आेंकार शर्मा और उपायुक्त पंकज राय से वासुकी नाग मंदिर के पास स्थित झील, कुगती पास होकर रापे-मणिमहेश ट्रैक रूट को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग की।
मणिमहेश ट्रैक पर सराय बनवाने का करेंगे प्रयास : ओंकार
जोवरंग के स्नो फेस्टिवल में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे जनजातीय विकास के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा का ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर ओंकार शर्मा ने कहा कि कहा कि जोवरंग-मणिमहेश चार दिन का ट्रैक है। सरकार के सहयोग से ट्रैक पर श्रद्धालुओं के लिए सराय बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित भी किया। इससे पहले उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।
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पुल नहीं होने पर वामतट पर बसे जोवरंग, रापे और राशेल गांव के लोग झाड़ी और पेड़ की टहनियों को बुनकर उसके सहारे नदी पार करते थे।
जोवरंग में आयोजित स्नो फेस्टिवल में स्थानीय महिला मंडलों की पारंपरिक परिधानों में झांकी निकाली। मंदिर प्रांगण से स्नो फेस्टिवल के आयोजन स्थल तक झांकी का आयोजन किया गया। स्थानीय युवक मंडन ने कोरोना पर नाटक व प्राचीनतम गीत घुरे, महिला मंडल जोवरंग, रापे, राशेल और फूड़ा की सदस्यों ने लाहौली गीतों पर लोकनृत्य पेश किया। राशेल गांव की महिमा ने बांसुरी बजाकर कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। रस्साकशी, तीरंदाजी, वंगताड़ और बुनाई प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ। स्नो फेस्टिवल में स्थानीय लोगों ने मुख्यातिथि एवं विशेष मेहमानों को यहां मनाए जाने वाले देवी-देवताओं को समर्पित प्राचीनतम योर उत्सव की जानकारी दी। वासुकी नाग टूरिज्म क्लब ने मुख्यातिथि जनजातीय विकास के प्रधान सचिव आेंकार शर्मा और उपायुक्त पंकज राय से वासुकी नाग मंदिर के पास स्थित झील, कुगती पास होकर रापे-मणिमहेश ट्रैक रूट को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग की।
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मणिमहेश ट्रैक पर सराय बनवाने का करेंगे प्रयास : ओंकार
जोवरंग के स्नो फेस्टिवल में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे जनजातीय विकास के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा का ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर ओंकार शर्मा ने कहा कि कहा कि जोवरंग-मणिमहेश चार दिन का ट्रैक है। सरकार के सहयोग से ट्रैक पर श्रद्धालुओं के लिए सराय बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित भी किया। इससे पहले उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।
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