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दशकों बाद पुराने स्वरूप में नजर आएगा दशहरा
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ुल्लू में दशहरा उत्सव की तैयारी को जिला भर के देवी-देवता के कारदार के साथ बैठक करते मंत्री व अधिका?
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव इस बार कुछ अलग अंदाज में मनाया जा रहा है। मेले में लगातार दो बैठकों के बाद यह तो स्पष्ट हो गया है कि इस बार व्यापार नहीं सजेगा। न ही लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र में रौनक देखने को मिलेगी।
दशहरा उत्सव की रौनक जिले के देवी-देवताओं से होती है। पहले दिन देवताओं का आकर्षण रहता है। इसके बाद देवी-देवता अस्थायी शिविरों में विराजमान होते हैं। छठे दिन निकलते हैं। इस बीच मेले में आकर्षण का केंद्र लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र रहता था। दशकों बाद ऐसा होने जा रहा है कि मेला बिल्कुल प्राचीन स्तर का होगा। मेले में मुख्य आकर्षण ही देवी-देवता होंगे। सुबह और शाम के समय देवताओं के पास होने वाली पूजा आरती की ध्वनियां कुल्लू घाटी में गूंजेंगी।
मेले में किसी तरह का शोर नहीं होगा। केवल देववाद्य यंत्रों की ध्वनियां ही सुनने को मिलेंगी। इसके साथ देवी-देवताओं के पास रात्रि के समय होने वाली लालड़ी आदि परंपराओं को भी बल मिलेगा। उपायुक्त और दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष आशुतोष गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव-2021 की रूपरेखा देव समाज से जुड़े लोगों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के सुझावों के अनुरूप ही तैयार की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि कोविड नियमों की अनुपालना करना सभी का दायित्व है। मैदान की क्षमता का 50 प्रतिशत भाग का ही उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक भीड़ को निमंत्रण नहीं दिया जा सकता, इसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा।
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दशहरा उत्सव की रौनक जिले के देवी-देवताओं से होती है। पहले दिन देवताओं का आकर्षण रहता है। इसके बाद देवी-देवता अस्थायी शिविरों में विराजमान होते हैं। छठे दिन निकलते हैं। इस बीच मेले में आकर्षण का केंद्र लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र रहता था। दशकों बाद ऐसा होने जा रहा है कि मेला बिल्कुल प्राचीन स्तर का होगा। मेले में मुख्य आकर्षण ही देवी-देवता होंगे। सुबह और शाम के समय देवताओं के पास होने वाली पूजा आरती की ध्वनियां कुल्लू घाटी में गूंजेंगी।
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मेले में किसी तरह का शोर नहीं होगा। केवल देववाद्य यंत्रों की ध्वनियां ही सुनने को मिलेंगी। इसके साथ देवी-देवताओं के पास रात्रि के समय होने वाली लालड़ी आदि परंपराओं को भी बल मिलेगा। उपायुक्त और दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष आशुतोष गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव-2021 की रूपरेखा देव समाज से जुड़े लोगों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के सुझावों के अनुरूप ही तैयार की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि कोविड नियमों की अनुपालना करना सभी का दायित्व है। मैदान की क्षमता का 50 प्रतिशत भाग का ही उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक भीड़ को निमंत्रण नहीं दिया जा सकता, इसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा।

कुल्लू में दशहरा उत्सव की तैयारी को लेकर बैठक में भाग लेते जिला भर के देवी-देवता के कारदार।- फोटो : Kullu