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Kullu News: माइनस 25 डिग्री तापमान में बर्फ के पहाड़ हारे, वीरों के हौसले जीते
Wed, 09 Apr 2025 05:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 09 Apr 2025 05:18 AM IST
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शिंकुला दर्रा बहाली में मशीनों से बर्फ हटाते बीआरओ के जवान। फाइल फोटो।
उदयपुर (लाहौल- स्पीति)। समुद्रतल से 16,558 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिंकुला दर्रा वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल हो गया है, लेकिन इसकी बहाली बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के लिए किसी युद्ध से कम नहीं रही। कड़ाके की ठंड, ऑक्सीजन की कमी और 30 फीट ऊंचे बर्फीले पहाड़ों के बीच बीआरओ के जवानों ने अदम्य साहस और मेहनत से यह असंभव कार्य संभव कर दिखाया।
बीआरओ की योजक परियोजना के अधीन इस अभियान में पांच भारी मशीनों और 40 से अधिक जवानों ने दारचा जीरो प्वाइंट से शिंकुला दर्रे तक 36 किलोमीटर लंबी सड़क को महज डेढ़ महीने में बहाल किया। रास्ते में पांच से लेकर 30 फीट ऊंची बर्फ की दीवारों को काटना पड़ा। माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तापमान, बर्फीली हवाएं और सांस लेने में कठिनाई जैसी विषम परिस्थितियों में भी जवानों ने हिम्मत नहीं हारी।
दर्रे के खुलने से अब लाहौल की केलांग, जिस्पा और दारचा घाटी से लेकर जांस्कर, लेह और लद्दाख की दूरी कम हो गई है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। अब शिंकुला दर्रे से गुजरने वाले सभी यात्रियों को दारचा में स्थापित पुलिस चेक पोस्ट में पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। पुलिस प्रशासन ने यातायात की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की है। फिलहाल सड़क को वन-वे रखा गया है, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
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उपायुक्त लाहौल-स्पीति राहुल कुमार ने बताया कि बीआरओ से दर्रा बहाली की रिपोर्ट मिलने के बाद लेह और लाहौल प्रशासन के बीच विमर्श हुआ और फिर वाहनों की आवाजाही के लिए शिंकुला दर्रा को औपचारिक रूप से खोल दिया गया।
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बीआरओ की योजक परियोजना के अधीन इस अभियान में पांच भारी मशीनों और 40 से अधिक जवानों ने दारचा जीरो प्वाइंट से शिंकुला दर्रे तक 36 किलोमीटर लंबी सड़क को महज डेढ़ महीने में बहाल किया। रास्ते में पांच से लेकर 30 फीट ऊंची बर्फ की दीवारों को काटना पड़ा। माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तापमान, बर्फीली हवाएं और सांस लेने में कठिनाई जैसी विषम परिस्थितियों में भी जवानों ने हिम्मत नहीं हारी।
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दर्रे के खुलने से अब लाहौल की केलांग, जिस्पा और दारचा घाटी से लेकर जांस्कर, लेह और लद्दाख की दूरी कम हो गई है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। अब शिंकुला दर्रे से गुजरने वाले सभी यात्रियों को दारचा में स्थापित पुलिस चेक पोस्ट में पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। पुलिस प्रशासन ने यातायात की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की है। फिलहाल सड़क को वन-वे रखा गया है, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
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उपायुक्त लाहौल-स्पीति राहुल कुमार ने बताया कि बीआरओ से दर्रा बहाली की रिपोर्ट मिलने के बाद लेह और लाहौल प्रशासन के बीच विमर्श हुआ और फिर वाहनों की आवाजाही के लिए शिंकुला दर्रा को औपचारिक रूप से खोल दिया गया।

शिंकुला दर्रा बहाली में मशीनों से बर्फ हटाते बीआरओ के जवान। फाइल फोटो।