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Kullu News: कुल्लू में गूंज रहे ब्रज की होली के गीत
Sun, 16 Feb 2025 10:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 16 Feb 2025 10:04 PM IST
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कुल्लू में बसंत पंचमी से ही मदिंरो में जाकर ब्रज के होली गीत गाते बैरागी समुदाय के लोग।-संवाद
जिले के मंदिरों में किया जा रहा होली गायन की परंपरा का निर्वहन
मान्यता ... 300 साल पुरानी परंपरा को निभा रहा है बैरागी समुदाय
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला कुल्लू में वसंत पंचमी से ब्रज के होली गीतों से भगवान राम का जयकारा किया जा रहा है। मंदिरों में होली गायन की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
बैरागी समुदाय 300 साल पुरानी परंपरा को वर्तमान समय में भी बखूबी निभा रहा है। शनिवार शाम को बैरागी समुदाय के लोगों ने हनुमानी बाग में स्थित देवता नारसिंह के मंदिर में होली गीतों का गायन किया।
होली गीतों से माहौल को भक्तिमय बना रहा। ...सखी री कोई मोड़ ले आओ, वन को चले दोनों भाई, ...शिवों संग भोले नाथों के संग होरी अपना खेलन जाऊ, ...मैं न लड़ी श्याम निखस गयो, ...मैं कैसे होरी खेलूं सांवरियां जी के संग रंग में आदि गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा। बैरागी समुदाय के विनोद महंत ने कहा कि होली को कुछ अलग अंदाज में मनाया जाता है। होली का आगाज कुल्लू में 40 दिन पहले वसंत पंचमी के दिन से हो जाता है। बैरागी समुदाय के लोग अधिष्ठाता देवता रघुनाथ के मंदिर सहित अन्य मंदिरों में होली गीत गाते हैं। बैरागी समुदाय के एकादशी मंहत, राज कुमार मंहत, मित्रभूषण मंहत, योगेश मंहत,सुंदर श्याम मंहत, धमेंद्र शर्मा, मुरारी मंहत,दौलत महंत और सुदर्शन महंत ने कहा कि वे युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से प्रेरित कर रहे हैं।
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मान्यता ... 300 साल पुरानी परंपरा को निभा रहा है बैरागी समुदाय
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला कुल्लू में वसंत पंचमी से ब्रज के होली गीतों से भगवान राम का जयकारा किया जा रहा है। मंदिरों में होली गायन की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
बैरागी समुदाय 300 साल पुरानी परंपरा को वर्तमान समय में भी बखूबी निभा रहा है। शनिवार शाम को बैरागी समुदाय के लोगों ने हनुमानी बाग में स्थित देवता नारसिंह के मंदिर में होली गीतों का गायन किया।
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होली गीतों से माहौल को भक्तिमय बना रहा। ...सखी री कोई मोड़ ले आओ, वन को चले दोनों भाई, ...शिवों संग भोले नाथों के संग होरी अपना खेलन जाऊ, ...मैं न लड़ी श्याम निखस गयो, ...मैं कैसे होरी खेलूं सांवरियां जी के संग रंग में आदि गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा। बैरागी समुदाय के विनोद महंत ने कहा कि होली को कुछ अलग अंदाज में मनाया जाता है। होली का आगाज कुल्लू में 40 दिन पहले वसंत पंचमी के दिन से हो जाता है। बैरागी समुदाय के लोग अधिष्ठाता देवता रघुनाथ के मंदिर सहित अन्य मंदिरों में होली गीत गाते हैं। बैरागी समुदाय के एकादशी मंहत, राज कुमार मंहत, मित्रभूषण मंहत, योगेश मंहत,सुंदर श्याम मंहत, धमेंद्र शर्मा, मुरारी मंहत,दौलत महंत और सुदर्शन महंत ने कहा कि वे युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से प्रेरित कर रहे हैं।
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