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फागली: ढोल-नगाड़ों के साथ घर-घर पहुंचे मुखौटाधारी
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कुल्लू जिला में फागली उत्सव की धूम है। बंजार के चैहणी में फागली उत्सव में नृत्य करते देवलू।-संवाद
- फोटो : Kullu
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बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार में विष्णु नारायण को समर्पित फागली उत्सव में नारायण के कृष्णावतार की लीलाओं का गुणगान 18 लोकगीतों के माध्यम से किया। मुखौटाधारी रविवार रात ढोल-नगाड़ों की थाप पर घर-घर गए और नृत्य किया। इस दौरान लोगों ने मुखौटाधारियों को जूब और केसर दिया।
फागली उत्सव फाल्गुन संक्रांति पर बंजार के बिणी, चैहणी, बेहलो, बाहू, देउठा समेत अन्य क्षेत्रों में मनाया जा रहा है। देवता के हारियान पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर नृत्य कर रहे हैं। अश्लील जुमलों से बुरी आत्माओं को भगाया जा रहा है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई, पाप पर पुण्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। जिसे कई सालों से देव आज्ञा के अनुसार मनाया जा रहा है। बंजार घाटी के बुजुर्ग चेत राम विष्ट, तोहर सिंह, याद राम ने बताया कि इस उत्सव में विष्णु नारायण के कृष्णावतार की लीलाओं की गाथाओं का गुणगान पहाड़ी में परंपरागत तरीके से ढोल, नगाड़े, मधुर ध्वनि के साथ किया जाता है।
फागली का अंग माने जाते हैं अश्लील जुमले
विष्णु नारायण भगवान की पौष माह के अंतिम सप्ताह में स्वर्गलोक की यात्रा और फाल्गुन संक्रांति की पूर्व संध्या को भूलोक पर वापसी के बाद उनके पहले धार्मिक अवतार समारोह के रूप में मनाया जा रहा है। फागली में अश्लील गालियों का दौर भी चलता है। इन अश्लील गालियों को उत्सव का ही एक अंग माना जाता है, इसलिए इन्हें बुरा नहीं माना जाता है।
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फागली उत्सव फाल्गुन संक्रांति पर बंजार के बिणी, चैहणी, बेहलो, बाहू, देउठा समेत अन्य क्षेत्रों में मनाया जा रहा है। देवता के हारियान पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर नृत्य कर रहे हैं। अश्लील जुमलों से बुरी आत्माओं को भगाया जा रहा है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई, पाप पर पुण्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। जिसे कई सालों से देव आज्ञा के अनुसार मनाया जा रहा है। बंजार घाटी के बुजुर्ग चेत राम विष्ट, तोहर सिंह, याद राम ने बताया कि इस उत्सव में विष्णु नारायण के कृष्णावतार की लीलाओं की गाथाओं का गुणगान पहाड़ी में परंपरागत तरीके से ढोल, नगाड़े, मधुर ध्वनि के साथ किया जाता है।
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फागली का अंग माने जाते हैं अश्लील जुमले
विष्णु नारायण भगवान की पौष माह के अंतिम सप्ताह में स्वर्गलोक की यात्रा और फाल्गुन संक्रांति की पूर्व संध्या को भूलोक पर वापसी के बाद उनके पहले धार्मिक अवतार समारोह के रूप में मनाया जा रहा है। फागली में अश्लील गालियों का दौर भी चलता है। इन अश्लील गालियों को उत्सव का ही एक अंग माना जाता है, इसलिए इन्हें बुरा नहीं माना जाता है।

कुल्लू जिला में फागली उत्सव की धूम है। बंजार के चैहणी में फागली उत्सव में नृत्य करते देवलू।-संवाद- फोटो : Kullu
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