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हिमालय पारिस्थितिक तंत्र बचाने के लिए संरक्षण आवश्यक : डॉ. सामंत
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राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र: एक जैव विविधता पर केंद्रित विषय पर दो
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कुल्लू। हिमालय पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए संरक्षण और संवर्द्धन आवश्यक है। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. एसएस सामंत ने हिमालय की विशेषताओं और विभिन्न प्रकार के पौधों, उनके औषधीय मूल्यों के बारे में भी समझाया। सोमवार को कुल्लू कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. सामंत मुख्य वक्ता रहे। कॉलेज में पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र एक जैव विविधता पर केंद्रित विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
संगोष्ठी का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनदीप शर्मा ने किया। प्राचार्य ने कहा कि पर्वतों के संरक्षण में जैव विविधता की अहम भूमिका है। राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रथम सत्र हिमालय क्षेत्र की जैव विविधता की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रहा। सरदार पटेल विश्वविद्यालय की डॉ. नीलम ने पाचन तंत्र की माइक्रोबियल विविधता, नैनो तकनीकी आविष्कार के माध्यम से कैंसर के उपचार में उपयोग विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया।
राज्य जैव विविधता बोर्ड शिमला के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एमएल ठाकुर ने हिमालय क्षेत्र में जानवरों की विविधता और उनके संरक्षण विषय पर विचार प्रस्तुत किए। हिमाचल नेचर पार्क के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डॉ. सेलकर डोलू लिंगदोह और आईआईटी मंडी के डॉ. श्याम मसक पल्ली ने व्याख्यान दिया। इस संगोष्ठी में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 55 प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण करवाया है। इस दौरान डॉ. मान सिंह, प्रो. रामनाथ, डॉ. बृजबाला, प्रो. सोमन, प्रो. जय प्रकाश, प्रो. सोहन आदि उपस्थित रहे। संवाद
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संगोष्ठी का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनदीप शर्मा ने किया। प्राचार्य ने कहा कि पर्वतों के संरक्षण में जैव विविधता की अहम भूमिका है। राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रथम सत्र हिमालय क्षेत्र की जैव विविधता की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रहा। सरदार पटेल विश्वविद्यालय की डॉ. नीलम ने पाचन तंत्र की माइक्रोबियल विविधता, नैनो तकनीकी आविष्कार के माध्यम से कैंसर के उपचार में उपयोग विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया।
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राज्य जैव विविधता बोर्ड शिमला के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एमएल ठाकुर ने हिमालय क्षेत्र में जानवरों की विविधता और उनके संरक्षण विषय पर विचार प्रस्तुत किए। हिमाचल नेचर पार्क के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डॉ. सेलकर डोलू लिंगदोह और आईआईटी मंडी के डॉ. श्याम मसक पल्ली ने व्याख्यान दिया। इस संगोष्ठी में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 55 प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण करवाया है। इस दौरान डॉ. मान सिंह, प्रो. रामनाथ, डॉ. बृजबाला, प्रो. सोमन, प्रो. जय प्रकाश, प्रो. सोहन आदि उपस्थित रहे। संवाद
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