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लाहौल में ही मिलेगी बाल देखभाल गृह की सुविधा : संकल्प
Fri, 23 Feb 2024 11:19 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 23 Feb 2024 11:19 PM IST
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के जिला मुख्यालय केलांग में शुक्रवार को बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक हुई। जिला स्तरीय त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता सहायक आयुक्त संकल्प गौतम ने की।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरानंद ने बैठक की कार्यवाही की। उन्होंने मिशन वात्सल्य योजना, जिला बाल संरक्षण इकाई की भूमिका और मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के बारे में जानकारी दी। कहा कि जिले में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 51 बच्चों का चयन हुआ है और सामाजिक सुरक्षा के तहत 4.80 लाख की राशि खर्च की जा रही है।
सहायक आयुक्त संकल्प गौतम ने कहा कि लाहौल-स्पीति में जल्द ही बाल देखभाल गृह की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भूमि चयन प्रक्रिया शुरू कर जाएगी। दरअसल हिमाचल में मात्र लाहौल-स्पीति में ही अभी तक बाल देखभाल गृह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जिले के जरूरतमंद और देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को जिले से बाहर भेजना पड़ रहा है।
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जिले में बाल मजदूरी और भिक्षावृति सहित बाल शोषण के कोई मामले नहीं हैं लेकिन पिछले दिनों बाल श्रम के मामले आए जिसपर पुलिस विभाग को उचित कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट करने को कहा गया है। कहा कि जून में विभिन्न विभागों के माध्यम से शिविर का आयोजन कर बच्चों में दिव्यांगता के कारणों का पता लगाया जाएगा।
बैठक में जिला पंचायत अधिकारी सचिन, पुलिस उपअधीक्षक राजकुमार, बीडीओ भुवनेश चढ्ढा, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय डोगरा, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति कुंदन शर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी खुशविंद्र ठाकुर अधिकारी मौजूद रहे। संवाद
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जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरानंद ने बैठक की कार्यवाही की। उन्होंने मिशन वात्सल्य योजना, जिला बाल संरक्षण इकाई की भूमिका और मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के बारे में जानकारी दी। कहा कि जिले में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 51 बच्चों का चयन हुआ है और सामाजिक सुरक्षा के तहत 4.80 लाख की राशि खर्च की जा रही है।
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सहायक आयुक्त संकल्प गौतम ने कहा कि लाहौल-स्पीति में जल्द ही बाल देखभाल गृह की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भूमि चयन प्रक्रिया शुरू कर जाएगी। दरअसल हिमाचल में मात्र लाहौल-स्पीति में ही अभी तक बाल देखभाल गृह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जिले के जरूरतमंद और देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को जिले से बाहर भेजना पड़ रहा है।
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जिले में बाल मजदूरी और भिक्षावृति सहित बाल शोषण के कोई मामले नहीं हैं लेकिन पिछले दिनों बाल श्रम के मामले आए जिसपर पुलिस विभाग को उचित कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट करने को कहा गया है। कहा कि जून में विभिन्न विभागों के माध्यम से शिविर का आयोजन कर बच्चों में दिव्यांगता के कारणों का पता लगाया जाएगा।
बैठक में जिला पंचायत अधिकारी सचिन, पुलिस उपअधीक्षक राजकुमार, बीडीओ भुवनेश चढ्ढा, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय डोगरा, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति कुंदन शर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी खुशविंद्र ठाकुर अधिकारी मौजूद रहे। संवाद