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बिगड़ा मौसम : उड़ी नींद, पड़ न जाए डाका
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फ्लावरिंग सीजन में बर्फबारी होने और अंधड़ चलने से फसल के प्रभावित होने के आसार
बागवानों को ओलावृष्टि का भी सता रहा डर, बगीचों पर टिकाईं नजरें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मौसम के बिगड़े मिजाज से बागवानों की आर्थिकी सेब, प्लम और नाशपाती की फसल प्रभावित होने के आसार है। फ्लावरिंग सीजन में बर्फबारी होने और अंधड़ चलने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। जिले के बागवानों की नींद उड़ गई है। फसल के प्रभावित होने से जेब पर भी डाका पड़ेगा। जिस तरह से मौसम बदल रहा है, उससे ओलावृष्टि की भी संभावना बन रही है। फसल को ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा असर पड़ता है।
जिले में बुधवार को ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। निचले क्षेत्रों में बारिश की फुहारों के साथ अंधड़ भी चला। वीरवार को भी खराब मौसम का सिलसिला जारी रहा। वीरवार सुबह से लेकर दोपहर तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। दोपहर बाद मौसम खुला और धूप खिली। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव और पाला पड़ने से फसल प्रभावित हो सकती है।
कहर बनकर टूटते हैं ओले
जिले में कई बार सेब की फसल पर ओले कहर बनकर टूटते हैं। अभी तक जिले में ओलों के चलते किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। इस पर कुल्लू जिले के बागवान अपनी नजरें बगीचों की ओर गड़ाए हुए हैं। मौसम की बेरुखी बागवानों पर भारी पड़ सकती है।
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तापमान में उतार चढ़ाव, होगी फसल प्रभावित
खराहल घाटी के बागवान चमन लाल, नाथू राम, नग्गर के बागवान डोला सिंह और नरेश कुमार ने कहा कि सेब पौधों में फूल खिले हुए हैं, लेकिन मौसम बार-बार रुख बदल रहा है। सेब की सेटिंग होने तक घाटी में मौसम साफ रहना जरूरी है। जिस तरह से पहाड़ों में बर्फ गिर रही है, इससे तापमान में उतार-चढ़ाव आएगा। पाला पड़ने से फ्लावरिंग पर असर पड़ सकता है। बागवान कई क्षेत्रों में पौधों में कम फूल आने के चलते पहले ही परेशान हैं। अगर मौसम बागवानों का साथ नहीं देता है तो बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। पिछले साल जिले में 50 फीसदी तक सेब की फसल कम हुई थी।
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अभी तक सेब की फ्लावरिंग पर हुए नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। सेब की सेटिंग के लिए मौसम अगर अनुकूल रहता है तो निश्चित तौर पर इसका फायदा बागवानों को मिलेगा।
-बीएम चौहान उपनिदेशक बागवानी विभाग कुल्लू
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बागवानों को ओलावृष्टि का भी सता रहा डर, बगीचों पर टिकाईं नजरें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मौसम के बिगड़े मिजाज से बागवानों की आर्थिकी सेब, प्लम और नाशपाती की फसल प्रभावित होने के आसार है। फ्लावरिंग सीजन में बर्फबारी होने और अंधड़ चलने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। जिले के बागवानों की नींद उड़ गई है। फसल के प्रभावित होने से जेब पर भी डाका पड़ेगा। जिस तरह से मौसम बदल रहा है, उससे ओलावृष्टि की भी संभावना बन रही है। फसल को ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा असर पड़ता है।
जिले में बुधवार को ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। निचले क्षेत्रों में बारिश की फुहारों के साथ अंधड़ भी चला। वीरवार को भी खराब मौसम का सिलसिला जारी रहा। वीरवार सुबह से लेकर दोपहर तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। दोपहर बाद मौसम खुला और धूप खिली। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव और पाला पड़ने से फसल प्रभावित हो सकती है।
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कहर बनकर टूटते हैं ओले
जिले में कई बार सेब की फसल पर ओले कहर बनकर टूटते हैं। अभी तक जिले में ओलों के चलते किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। इस पर कुल्लू जिले के बागवान अपनी नजरें बगीचों की ओर गड़ाए हुए हैं। मौसम की बेरुखी बागवानों पर भारी पड़ सकती है।
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तापमान में उतार चढ़ाव, होगी फसल प्रभावित
खराहल घाटी के बागवान चमन लाल, नाथू राम, नग्गर के बागवान डोला सिंह और नरेश कुमार ने कहा कि सेब पौधों में फूल खिले हुए हैं, लेकिन मौसम बार-बार रुख बदल रहा है। सेब की सेटिंग होने तक घाटी में मौसम साफ रहना जरूरी है। जिस तरह से पहाड़ों में बर्फ गिर रही है, इससे तापमान में उतार-चढ़ाव आएगा। पाला पड़ने से फ्लावरिंग पर असर पड़ सकता है। बागवान कई क्षेत्रों में पौधों में कम फूल आने के चलते पहले ही परेशान हैं। अगर मौसम बागवानों का साथ नहीं देता है तो बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। पिछले साल जिले में 50 फीसदी तक सेब की फसल कम हुई थी।
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अभी तक सेब की फ्लावरिंग पर हुए नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। सेब की सेटिंग के लिए मौसम अगर अनुकूल रहता है तो निश्चित तौर पर इसका फायदा बागवानों को मिलेगा।
-बीएम चौहान उपनिदेशक बागवानी विभाग कुल्लू